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पांच ऐसे शेयर जो हो सकते हैं फायदे का सौदा
विशाल छाबडिय़ा /  July 03, 2016

सिर्फ चार महीने में बीएसई के सेंसेक्स में 18 फीसदी की तेजी आई है और मिडकैप एवं स्मॉलकैप सूचकांक 22-24 फीसदी मजबूत हुए हैं। यह तेजी चीन की धीमी अर्थव्यवस्था, अमेरिका में कमजोरी और हाल के ब्रेक्सिट जैसे वैश्विक घटनाक्रम के बावजूद दर्ज की गई है। लगता है कि दुनियाभर के वित्तीय बाजारों ने ब्रेक्सिट से पैदा होने वाले जोखिम को नजरअंदाज किया है और इस घटनाक्रम (ब्रेक्सिट) के तुरंत बाद आई कमजोरी की भरपाई की कोशिश की है। हालांकि कई जानकारों का मानना है कि मध्यावधि के संदर्भ में यह घटनाक्रम वैश्विक वृद्घि दरों को नीचे ला सकता है और साथ ही यूरोपीय देशों में तनाव बढ़ा सकता है। ऐसे जोखिमों को सहने के लिहाज से बाजार बेहद संवेदनशील हैं। 

 
अन्य मुद्दा यह है कि भारतीय बाजार का मौजूदा मूल्यांकन सस्ता नहीं है और आय वृद्घि भी आकर्षक नहीं है। ऐसे परिदृश्य में, उन जांची-परखी कंपनियों के साथ ही चिपके रहना बेहतर है जिनमें आय वृद्घि की संभावना मजबूत है। यहां लगभग 50,000 करोड़ रुपये के बाजार मूल्य वाली उन पांच बड़ी कंपनियों के बारे में अहम जानकारी पेश की जा रही है जो निवेश के लिहाज से उपयुक्त हैं। 
 
लगातार मजबूत आय वृद्घि, सराहनीय परिसंपत्ति गुणवत्ता और मजबूत ब्रांड के शानदार रिकॉर्ड के साथ एचडीएफसी बैंक के शेयर ने अच्छा प्रतिफल दिया है। मंदी के दौर में भी इस शेयर का प्रदर्शन अच्छा रहा। मई 1995 में सूचीबद्घता के बाद से यह शेयर 27 फीसदी की सालाना चक्रवृद्घि दर से बढ़ा है और इसका पिछले पांच साल का प्रतिफल प्रति वर्ष 18.7 फीसदी रहा। अधिक लाभदायक रिटेल एवं कार्यशील पूंजी (कंपनियों की) सेगमेंटों पर बैंक द्वारा अधिक ध्यान दिए जाने से वृद्घि की रफ्तार मजबूत बनाने में मदद मिली है। भारत में बैंकिंग पहुंच कमजोर बने रहने से एचडीएफसी बैंक इसका लाभ उठाने के लिहाज से बेहतर स्थिति में है। बैंक को वित्त वर्ष 2017 में 21 फीसदी की आय वृद्घि और वित्त वर्ष 2018 में 23 फीसदी की वृद्घि का अनुमान है।
 
इंडियन ऑयल (आईओसी) सुधरते परिदृश्य, बेहतर वित्तीय स्थिति और मजबूत नीतियों की वजह से रेटिंग में बदलाव देख सकती है। उसका शुद्घ कर्ज-पूंजी अनुपात वित्त वर्ष 2014 के एक फीसदी से घटकर वित्त वर्ष 2016 में 0.4 फीसदी पर पहले ही आ चुका है, क्योंकि तेल कीमतें नीचे आई हैं और आईओसी को ईंधन बेचने की लागत को लागत कीमत से नीचे लंबे समय तक साझा करने की जरूरत नहीं है। वहीं उसके प्रमुख व्यवसायों के लिए वित्त वर्ष 2017 का परिदृश्य अच्छा बना हुआ है और रिफाइनिंग मार्जिन सिंगापुर बेंचमार्क से ऊपर है, हालांकि पेट्रोरसायन का प्रदर्शन कुछ हद तक सपाट रह सकता है। 
 
वहीं मारुति कई मुख्य वजहों से भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता है। इन वजहों में उसके द्वारा लगातार ग्राहकों की जरूरतों को पूरा किया जाना भी शामिल है। इसके अलावा बेमिसाल सर्विस नेटवर्क की वजह से ईंधन-किफायती और गुणवत्तायुक्त कारों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बेचना भी अहम है। कंपनी सियाल, विटारा ब्रेजा, बलेनो आदि जैसी सभी श्रेणियों में महंगी/प्रीमियम कारों को लेकर बढ़ रही महत्त्वाकांक्षाओं को भी पूरा कर रही है। हालांकि कंपनी को एंट्री लेवल सेगमेंट (ऑल्टो, वैगन आर) में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि भविष्य में उसे पुन: लॉन्च से मदद मिल सकती है। मारुति द्वारा भविष्य में हर साल एक-दो नए वाहन लॉन्च किए जाने की संभावना है। 
 
विद्युत क्षेत्र में सुस्ती के बावजूद पावर ग्रिड पर इसका कम असर पड़ा है और कंपनी ट्रांसमिशन सेगमेंट में अवसरों का दोहन करने में सफल रही है। इसका अंदाजा पिछले पांच साल में इसके राजस्व और शुद्घ लाभ में दोगुनी वृद्घि से भी लगाया जा सकता है। कंपनी ने निवेश पर लगातार ध्यान केंद्रित किया है और नई पारेषण क्षमताएं शुरू की हैं। वित्त वर्ष 2016 में उसने 32,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ नई क्षमता शुरू की जो एक साल पहले के आंकड़े की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत अधिक है और वित्त वर्ष 2017 के लिए यह आंकड़ा समान स्तर पर रहने का अनुमान है। यही वजह है कि विश्लेषकों को इसकी आय में अगले कुछ वर्षों के दौरान सालाना 20 फीसदी तक की तेजी आने की उम्मीद है। अल्ट्राटेक सीमेंट ने भी मुनाफे के मोर्चे पर अच्छा प्रदर्शन किया है। एडलवाइस का कहना है कि सीमेंट निर्माता कंपनी वित्त वर्ष 2016 के लिए 936 रुपये की प्रति टन परिचालन आय के साथ श्रेष्ठï कंपनियों में शुमार है। लगभग 8 से 10 फीसदी की बिक्री वृद्घि और वित्त वर्ष 2017 में परिचालन आय पर मार्जिन बढ़त के साथ कंपनी की आय वित्त वर्ष 2017 में 30 फीसदी से अधिक बढऩे का अनुमान है। इसी तरह की वृद्घि कंपनी द्वारा वित्त वर्ष 2018 में दर्ज किए जाने की संभावना है। यही वजह है कि अल्ट्राटेक का शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। वित्त वर्ष 2016 में परिचालन से लगभग 4500 करोड़ रुपये का नकदी प्रवाह हासिल करने वाली कंपनी यदि बड़े अधिग्रहण करती है तो भी अपने मौजूदा 10,000 करोड़ रुपये के कर्ज (0.48 का कर्ज पूंजी अनुपात) का प्रबंधन करने में सक्षम है। 
Keyword: share, market, sensex,,
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