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अब बीमा एजेंट पारदर्शिता के दायरे में
प्रिया नायर /  June 19, 2016

जो लोग जीवन बीमा पॉलिसी खरीदने के बारे में विचार कर रहे हैं, वे अब एजेंट से यह पूछ सकते हैं कि उन्हें प्रीमियम में से कितना कमीशन मिलेगा और एजेंट को इसका खुलासा करना होगा। पहले यह शर्त केवल यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान पर ही लागू थी। इसके अलावा ग्राहक एजेंटों की प्रामाणिकता का पता करने के लिए उनसे पहचान पत्र या नियुक्ति पत्र दिखाने को कह सकते हैं। 

 
अब एजेंटों को पॉलिसीधारक को पहले ही पॉलिसी के रद्द होने या स्वीकृत होने के आसार के बारे में बताना होगा। एजेंट बीमा कंपनी से यह भी नहीं छिपा सकेंगे कि पॉलिसीधारक धूम्रपान करता है या नहीं क्योंकि इससे अंडरराइटिंग पर असर पड़ेगा। गत वर्षों में एजेंट ऐसी सूचनाओं को छिपा लेते थे, ताकि पॉलिसी मंजूर हो जाए। ये हाल में भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) द्वारा बीमा एजेंटों की नियुक्ति के नियमनों में बीमा एजेंटों के लिए बनाई गई आचार संहिता की कुछ विशेषताएं हैं। हालांकि इस आचार संहिता के कुछ नियम पहले से ही लागू थे, लेकिन वर्तमान अधिसूचना का पालन हर बीमा कंपनी को करना होगा। 
 
नियमनों में यह भी कहा गया है कि एजेंट विभिन्न कीमतों, लाभ, बीमा कंपनी से इतर नियम एवं शर्तों की पेशकश नहीं करेंगे और बीमा अनुबंध के तहत लाभार्थी से प्राप्त होने वाली राशि में हिस्से की मांग नहीं करेंगे या हिस्सा लेंगे। एजेंट पॉलिसीधारक को वर्तमान पॉलिसी खत्म करने और तीन साल के भीतर नई पॉलिसी खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेंगे। अगर एजेंट का लाइसेंस रद्द किया जाता है तो वह पांच साल से पहले फिर से नियुक्ति के लिए आवेदन नहीं कर सकता है। आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले एजेंट पर 10,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इस मामले में बीमा कंपनियों पर भी जुर्माना लग सकता है क्योंकि एजेंटों को लेकर उनकी भी जिम्मेदारी होती है। 
 
भारती एक्सा लाइफ इंश्योरेंस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (अनुपालन) और मुख्य जोखिम अधिकारी सीएल भारद्वाज कहते हैं, 'यह आचार संहिता पॉलिसी की बिक्री में पारदर्शिता को बढ़ावा देती है और ग्राहक को पॉलिसी लेने के फैसले के लिए आवश्यक सूचना की मांग करने का अधिकार देती है। एजेंटों को काली सूची में डालने और सेंट्रल डाटाबेस बनाने की पहल का मकसद एजेंटों की पृष्ठभूमि का सत्यापन करना है ताकि ग्राहकों के हितों की सुरक्षा की जा सके।'
 
इंडिया फस्र्ट लाइफ इंश्योरेंंस के बिक्री एवं विपणन निदेशक ऋषभ गांधी कहते हैं, 'इससे पारदर्शिता आएगी जिससे उद्योग को फायदा होगा। यह ग्राहकों की सुरक्षा और भ्रामक जानकारी देकर बिक्री से संबंधित जोखिम कम करती है। कुछ लोग यह मान सकते हैं कि अगर ग्राहक को यह पता चल जाएगा कि मैं एक परंपरागत पॉलिसी पर कितना कमा रहा हूं तो वह मुझे कमीशन के लिए कह सकता है और इससे बिक्री प्रक्रिया कमजोर पड़ेगी। लेकिन इसका असर बहुत ही कम और अस्थायी होगा।'
 
गांधी कहते हैं कि परंपरागत पॉलिसियों में पहले साल कमीशन 40 फीसदी तक हो सकता है, जिसे ग्राहक बहुत अधिक मान सकते हैं। लेकिन अगर पॉलिसी ग्राहक की जरूरत पूरी करती है तो वह इसे खरीदना चाहेगा, भले ही उसे यह पता हो कि एजेंट को कितना कमीशन मिल रहा है। इसलिए एजेंटों को उपभोक्ताओं को सही उत्पाद बेचना होगा। अब ग्राहक बीमा एजेंट से यह दिखाने के लिए कह सकते हैं कि संबंधित पॉलिसी उनकी बीमा जरूरत कैसे पूरी करती है। उत्पाद की विशेषताओं की प्रामाणिकता के लिए ग्राहक बीमा कंपनी द्वारा एजेंट को मुहैया कराए जाने वाले उत्पाद ब्रोशर की एक प्रति मांग सकते हैं। 
 
भारद्वाज ने कहा, 'पॉलिसी की बिक्री के समय अतिरिक्त प्रीमियम (अगर कोई है) सहित लिए जाने वाले बीमा प्रीमियम, लाभ, नॉमिनेशन सुविधा, एक्सक्लूजन (जिन परिस्थतियों में लाभ नहीं दिए जाएंगे) का खुलासा करना होगा और अगर इनका खुलासा नहीं किया गया तो ग्राहक यह मांग कर सकते हैं।' आईआरडीएआई काली सूची में डाले गए एजेंटों की सूची रखता है। ग्राहक उसके पोर्टल पर एजेंट का नाम, लाइसेंस नंबर (अगर उपलब्ध है), बीमा के प्रकार, बीमा कंपनी का नाम, राज्य और जिला आदि सूचनाएं डालकर इस बात का पता लगा सकते हैं कि एजेंट को काली सूची में डाला गया है या नहीं। कुछ बीमा कंपनियां भी अपनी वेबसाइट पर काली सूची में डाले हुए एजेंटों की सूची प्रकाशित करती हैं। ग्राहक काली सूची में डाले गए एजेंटों के बारे में सीधे बीमा कंपनी या इरडा के पोर्टल के जरिये शिकायत कर सकते हैं। 
Keyword: insurance, policy, book,,
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