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एसआईपी में बढ़ी निवेशकों की रुचि
संजय कुमार सिंह /  June 19, 2016

पिछले कम से कम दो साल में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में व्यक्तिगत निवेशकों की दिलचस्पी खासी बढ़ गई है। इसके परिणामस्वरूप इनकी कुल संख्या मार्च में बढ़कर 93 लाख हो गई, जो मार्च 2014 में 52 लाख थी। हरेक महीने एसआईपी के जरिये निवेश की जाने वाली रकम भी इस दौरान 1,206 करोड़ रुपये के मुकाबले दोगुनी से भी ज्यादा हो गई और 2,747 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यह देखकर म्युचुअल फंड कंपनियां भी एसआईपी की प्रक्रिया को आसान बना रही हैं ताकि निवेशकों को इसमें रकम लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। इसमें कई तरह की नई सुविधाएं भी दी जा रही हैं।

 
रिलायंस निप्पन लाइफ ऐसेट मैनेजमेंट ने तत्काल एसआईपी पंजीयन की सुविधा शुरू कर दी है। कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी संदीप सिक्का कहते हैं, 'कागजी दरख्वास्त के जरिये या इंटरनेट के जरिये एसआईपी के पंजीकरण में 21 दिन तक का वक्त लग सकता है। जब आप कागजी फॉर्म जमा कर सकते हैं तो हो सकता है कि आपके दस्तखत या दूसरी अहम सूचनाएं मूल नहीं खाती हों। ऐसी सूरत में आपका फॉर्म खारिज कर दिया जाएगा। इंटरनेट के जरिये पंजीकरण करने में भी कई तरह की दिककतें आती हैं क्योंकि इनमें निवेशकों को बिलर अलग से जोडऩे पड़ते हैं।' तत्काल पंजीयन की प्रक्रिया में इन सभी झंझटों से निजात मिल जाती है। इसमें वेबसाइट पर लॉग इन करने पर निवेशकों को योजना, निवेश की राशि, एसआईपी की तारीख आदि चुननी होती है। उसके बाद वह एचडीएफसी बैंक के नेट बैंकिंग पेज पर पहुंच जाते हैं। वहां वे लॉग इन कर सकते हैं और 1 रुपये चुकाकर एसआईपी पंजीकरण की प्रक्रिया को फौरन पूरा कर सकते हैं। फंड कंपनी दूसरे बैंकों से भी बातचीत कर रही है ताकि उनके ग्राहकों के लिए भी यह सुविधा शुरू कराई जा सके।
 
क्वांटम म्युचुअल फंड ने हाल में ई-केवाईसी और इन-पर्सन वेरिफिकेशन (आईपीवी) यानी व्यक्तिगत सत्यापन की प्रक्रिया आसान कर दी है। पहले ई-केवाईसी ऑनलाइन भरना पड़ता था और उसके बाद फंड कंपनी के प्रतिनिधि से वेबकैम पर रूबरू होना पड़ता था। अब आपको ऐसा करने की जरूरत ही नहीं है। आप सेल्फी वीडियो भेजकर भी इस प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं।
 
फंड कंपनियों ने सिस्टेमैटिक ट्रांसफर याजनाओं (एसटीपी) के नियमों में भी बदलाव किए हैं। एसटीपी के तहत लिक्विड फंड के जरिये रकम हस्तांतरित होती है और इक्विटी में फंड में निवेश की जाती है। नए नियमों से उतार-चढ़ाव का बेहतर फायदा उठाया जा सकता है और प्रतिफल भी पहले से ज्यादा मिलता है। एचडीएफसी म्युचुअल फंड की फ्लेक्स एसटीपी में जब शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य (एनएवी) उस स्तर से अधिक होता है, जिस पर आपने निवेश शुरू किया है तो निवेशक उतनी ही रकम का निवेश करता रहता है। जब इसमें गिरावट आती है तो गिरावट के ही अनुपात में निवेशक को रकम बढ़ानी पड़ती है। फंड कंपनी की स्विंग एसटीपी एक कदम आगे है। जब एनएवी कम होता है तो आप अधिक निवेश करते हैं और जब एनएवी बढ़ता है और आपका निवेश उसी अनुपात में कम हो जाता है।
 
अब आपके पास टॉप-अप एसआईपी की सहूलियत भी है। इसके पीछे बुनियादी दलील यही है कि आपकी बचत और आपका निवेश आपके वेतन के हिसाब से बढऩा चाहिए। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी के मुख्य कार्याधिकारी निमेष शाह कहते हैं, 'अगर इसे चुन लिया जाता है तो ग्राहक को वेतन बढऩे पर हर बार नया एसआईपी शुरू करने या निवेश की राशि में इजाफा करने के झंझट से मुक्ति मिल जाती है। इसमें खुद ही निवेश की राशि बढ़ जाती है। यह ग्राहकों को उनका लक्ष्य तेजी से प्राप्त करने में भी मदद करता है।' आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल ग्राहकों को हर छह महीने में या साल में एसआईपी की रकम 5-10 प्रतिशत या 500 रुपये से 1000 रुपये तक बढ़ाने की छूट देती है। 
 
वेतनभोगी लोगों के लिए एसआईपी एक सटीक योजना होती है क्योंकि इसमें नकदी प्रवाह और निवेश के बीच ताल-मेल बना रहता है। हालांकि शेयरों में निकट अवधि में आने वाले उतार-चढ़ाव से आपको एसआईपी योजनाएं भी नहीं बचा सकतीं। बेंगलूरु की वेल्दी डॉट इन के संस्थापक आदित्य अग्रवाल कहते हैं, 'बाजार में तेज गिरावट के समय आपको एसआईपी में निवेश बंद नहीं करना चाहिए। उसका ज्यादा फायदा उठाने के लिए निवेशकों को फंड के प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए और पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखना चाहिए।'
Keyword: share, market, sensex, SIP,,
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