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हवाई यात्रियों के लिए राहत
प्रिया नायर /  June 19, 2016

भारत में हवाई यात्रा करने वाले लोगों को यह जानकर खुशी होगी कि विदेशी यात्रियों की तुलना में वे बेहतर स्थिति में हैं। सबसे अहम बात यह है कि भारत में अधिकांश विमानन कंपनियां टिकट का पैसा वापस करने को तैयार रहती हैं, जबकि विदेशों में ऐसा नहीं है। वहां अधिकांश कंपनियां नॉन रिफंडेबल टिकट देती हैं। यानी टिकट का पैसा वापस नहीं किया जाता है। इसके अलावा अतिरिक्त सामान पर विदेशों की तुलना में भारत में कम पैसा चुकाना पड़ता है। विदेशी विमानन कंपनियां अतिरिक्त सामान पर 100-200 डॉलर या 75 से 150 यूरो तक वसूलती हैं जबकि भारतीय कंपनियां 15 किलोग्राम से अधिक सामान पर 300 से 500 रुपये प्रति किलोग्राम वसूलती हैं। 

 
नागरिक उड्डïयन मंत्रालय की नई विमानन नीति में 15 किलोग्राम सामान की मुफ्त सीमा के बाद पांच किलोग्राम तक 100 रुपये अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव रखा गया है। इससे हवाई सफर और सस्ता हो जाएगा। साथ ही टिकट रद्द करने पर काटे जाने वाले शुल्क में कटौती और यात्रियों को विमान में नहीं चढऩे देने पर मुआवजा बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। फिलहाल यह उड़ान की दूरी के हिसाब से 2,000 से लेकर 4,000 रुपये तक है। इसे 5,000 से लेकर 10,000 रुपये करने का प्रस्ताव है। उम्मीद की जा रही है कि इन उपायों से पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। साथ ही विमानन कंपनियां न तो जरूरत से ज्यादा बुकिंग करेंगी और न ही अंतिम क्षणों में उड़ान रद्द करेंगी। अमूमन हवाई यात्रा टिकट में मूल किराये के अलावा सरकारी टैक्स भी अनिवार्य रूप से शामिल होते हैं। अतिरिक्त शुल्क में ऑनलाइन बुकिंग के लिए सुविधा शुल्क, अतिरिक्त सामान पर लगने वाला शुल्क, सीट चयन, खानापीना, रद्द करने का शुल्क, उड़ान की तारीख या समय बदलने, सीट अपग्रेड करने, नाम बदलने, स्ट्रेचर, खेल उपकरण और नहीं आने का शुल्क शामिल होते हैं।
 
उदाहरण के लिए मुंबई-बेंगलूरु की 22 जुलाई की उड़ान का मूल किराया 1,519 रुपये और अधिभार 841 रुपये है। इस तरह कुल किराया 2,360 रुपये है। यह फुल सर्विस कैरियर के लिए इकोनॉमी श्रेणी का सबसे कम किराया है। लेकिन जब आप यह टिकट रद्द करवाते हैं तो इसमें आपका पूरा पैसा चला जाएगा। विमान कंपनी टिकट रद्द करवाने पर बतौर शुल्क 2,500 रुपये काटती है। इसी तरह अगर आप यात्रा की तारीख बदलते हैं तो आपसे 2,250 रुपये वसूल किए जाते हैं। कॉक्स ऐंड किंग्स के कॉरपोरेट ट्रेवल के प्रमुख जॉन नायर कहते हैं, 'नॉन रिफंडेबल टिकट में केवल अनिवार्य कर की राशि ही वापस मिलती है जबकि रिफंडेबल टिकट पर रद्द कराने का शुल्क काटा जाता है और सुविधा शुल्क भी वापस नहीं किया जाता। बाकी राशि वापस कर दी जाती है।'
 
ईजीगो1डॉटकॉम की मुख्य कार्याधिकारी और निदेशक नीलू सिंह का कहना है कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप टिकट रद्द करने का फैसला कब करते हैं। अगर आप टिकट बुक कराने के बाद यात्रा नहीं करते हैं तो ऐसी सूरत में आपके केवल सरकारी कर की राशि ही वापस मिलेगी। अगर टिकट रद्द करने का शुल्क मूल किराये और ईंधन शुल्क से ज्यादा है तो मूल किराया और ईंधन शुल्क कट जाएगा।
 
ऐसे मामलों में सरकार के इस प्रस्ताव से मदद मिलेगी कि टिकट रद्द करने का शुल्क मूल किराये से अधिक नहीं होना चाहिए। साथ ही विमानन कंपनियां रिफंड के लिए अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूलेंगी। अगर कोई यात्री यात्रा नहीं करता है तो विमानन कंपनियां उसे सरकारी टैक्स की राशि, यूजर डेवलपमेंट फीस/हवाई अड्डïा विकास शुल्क/यात्री सेवा शुल्क वापस करेंगी।  क्लीयरट्रिपडॉटकॉम के मुख्य राजस्व अधिकारी अमित तनेजा ने कहा, 'टिकट रद्द कराने की स्थिति में काटे जाने वाले शुल्क की सीमा तय करने से उपभोक्ताओं के लिए आसानी होगी क्योंकि अलग-अलग विमानन कंपनियां अलग-अलग शुल्क वसूलती हैं और इनमें लगातार बढ़ोतरी हुई है।' अगर टिकट किसी एजेंट या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से बुक कराई गई है तो शुल्क में अंतर हो सकता है। विमानन कंपनियां साथ ही सुविधा शुल्क के तौर पर 100 से 200 रुपये तक वसूलती हैं जिसमें क्रेडिट, डेबिट, इंटरनेट बैंकिंग चार्ज, ऑनलाइन लेनदेन के लिए वेब फीस और एयरपोर्ट टिकटिंग काउंटर चार्ज आदि शामिल होते हैं। नीलू सिंह ने कहा कि मनपसंद सीट चुनने के लिए जेब से 500 से 800 रुपये तक ढीले करने पड़ सकते हैं। यह भी इस बात पर निर्भर करता है कि आप कौन सी सीट चुनते हैं। तनेजा ने कहा, 'नई विमानन नीति का मकसद विमानन कंपनियों को उड़ान रद्द करने और जरूरत से ज्यादा बुकिंग करने से हतोत्साहित करना है। ऐसे में यदि मुआवजा ज्यादा है तो कंपनियों की कोशिश हर हाल में उड़ान संचालित करने की होगी। मुआवजे के तौर पर मिलने वाली रकम से कम से कम आप यात्रा की वैकल्पिक व्यवस्था का इंतजाम कर सकेंगे।'
Keyword: aviation, airport, airlines,,
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