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कर में मामूली बढ़त से बड़ी चपत
तिनेश भसीन /  June 19, 2016

जहां आपके निवेश आपको कम प्रतिफल दे रहे हैं वहीं अप्रत्यक्ष करों में वृद्घि ने डायरेक्ट-टु-होम टीवी रिचार्ज, टेलीफोन बिल, बीमा भुगतान, क्रेडिट कार्ड शुल्क, रेस्टोरेंट बिल और ओला एवं उबर जैसी सेवाओं को महंगा बनाकर आपका खर्च बढ़ाया है। पिछले साल जून में सेवा कर की दर 12.36 फीसदी से बढ़ाकर 14 फीसदी की गई थी। इसके बाद सरकार ने 15 नवंबर से स्वच्छ भारत उपकर लागू कर दिया और अब कृषि कल्याण उपकर लागू कर दिया गया है। कुल मिलाकर अब आप विभिन्न सेवाओं के लिए लगभग तीन फीसदी अधिक भुगतान कर रहे हैं। 

 
अन्स्र्ट ऐंड यंग (ईवाई) में टैक्स पार्टनर अमरपाल चड्ढïा इस गणित को इस तरह समझाते हैं। माना कि आप इन सेवाओं पर हर साल 3 लाख रुपये खर्च करते हैं तो आपको पिछले साल जून तक करों के रूप में 37,080 रुपये चुकाने पड़ते थे। लेकिन इस साल जून से आपको करों के रूप में 45,000 रुपये चुकाने होंगे यानी करों में 7,920 रुपये की बढ़ोतरी हो गई। हालांकि अगर व्यवसायी अपने व्यवसाय के रूप में इन सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं तो वे बहुत से खर्चों पर कर छूट हासिल कर सकते हैं। इन करों में वृद्धि से वेतनभोगी और सेवानिवृत व्यक्ति सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। 
 
प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (पीडब्ल्यूसी) में पार्टनर (अप्रत्यक्ष कर) अनीता रस्तोगी कहती हैं, 'एक साल बाद आपको अप्रत्यक्ष करों के रूप में ज्यादा रकम चुकानी होगी।' वह कहती हैं, 'यदि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होता है तो दरें 17 से 20 फीसदी के बीच होंगी। अगर जीएसटी संसद में पारित नहीं होता है तो सरकार सेवा कर में और इजाफा कर सकती है और इन दरों को धीरे धीरे बढ़ाकर प्रस्तावित जीएसटी की दरों के बराबर किया जा सकता है। यह काम इस उम्मीद से किया जाएगा कि भविष्य में जीएसटी लागू होगा और करदाताओं पर ऊंचे दरों का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।'
 
उपकर पर रास्ता 
 
केंद्र आयकर या अप्रत्यक्ष करों को बढ़ाने के बजाय उपकर में बढ़ोतरी करता है, इसके पीछे वाजिब कारण हैं। वित्त आयोग के सुझावों के मुताबिक केंद्र सरकार को विभिन्न करों से प्राप्त राजस्व राज्य सरकारों के साथ साझा करना होगा। इस समय राज्यों को करों में 42 फीसदी हिस्सा मिलता है। ईवाई में मुख्य नीति सलाहकार डी के श्रीवास्तव कहते हैं, 'जब केंद्र उपकर के जरिये धन इक्ट्ठा करता है तो वह उस योजना के लिए पूरी राशि अपने पास रख सकता है। उपकर से केंद्र को स्वतंत्र रूप से कोष के इस्तेमाल में मदद मिलती है।'
 
वह कहते हैं कि न सिर्फ आयकर में वृद्घि आपको प्रभावित करती है बल्कि अप्रत्यक्ष करों में बढ़ोतरी भी लोगों की जेब पर भार बढ़ाते हैं। ज्यादा राजस्व के लिए सरकार सेवा कर की तरह अप्रत्यक्ष करों में भी बढ़ोतरी करती है। वित्त मंत्री ने कार कंपनियों पर 1 से 4 फीसदी तक बुनियादी ढांचा उपकर लगा दिया है। कार कंपनियां इस उपकर का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं। यह उपकर भारी इंजन वाली कारों पर ज्यादा है। इसके अलावा कोयले और लिग्नाइट पर स्वच्छ पर्यावरण उपकर दोगुना किया गया है।
 
कम प्रतिफल, अधिक कर
 
यदि आप अपने निवेश पर प्रतिफल के लिहाज से विचार करते हैं तो करों में वृद्घि का प्रभाव साफ दिखने लगता है। एक साल पहले आप बैंक जमाओं से 7.75 से 8 फीसदी तक प्रतिफल हासिल कर सकते थे। लेकिन अब ब्याज दरें गिरने से प्रतिफल 75 से 100 आधार अंक तक कम हो गया है। सरकार ने छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें घटाई हैं। डाकघर में एक वर्षीय सावधि जमा एक साल पहले 8.4 फीसदी का प्रतिफल देती थी। वहीं अब यह दर घटकर 7.1 फीसदी रह गई है। कई अन्य योजनाओं में प्रतिफल 0.4 से 1.3 फीसदी घटा है।  इक्विटी निवेश पर प्रतिफल भी कमजोर है। बीएसई के एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स ने पिछले एक साल में 0.90 फीसदी प्रतिफल दिया है। इसका मतलब है कि आपको समान अवधि में अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अपने निवेश को बढ़ाने की जरूरत होगी। जहां आपकी बचत दर गिर रही है वहीं मुद्रास्फीति पिछले एक साल में औसतन 5 फीसदी रही है। यदि आपने आवास ऋण ले रखा है तो खर्च चलाना और मुश्किल हो जाएगा क्योंकि बैंकों के दरें घटाने के बावजूद ईएमआई में कोई बड़ी कमी नहीं आई है। 
 
ऐसे में तीन फीसदी की कर वृद्घि भी आपका बजट बिगाड़ सकती है। एक फाइनैंस कंपनी के कर्मचारी कौस्तुभ मसुरकर ने रेस्टोरेंटों और मल्टीप्लेक्सों में जाना कम कर दिया है। मसुरकर कहते हैं, 'यदि आप रेस्तरां में 1,500 रुपये खर्च करते हैं तो आपको विभिन्न कर और शुल्कों के तौर पर 250 से 450 रुपये चुकाने पड़ सकते हैं, हालांकि यह इस पर निर्भर करता है कि रेस्टोरेंट सेवा शुल्क वसूल रहा है या नहीं। वेतन में इकाई अंक में वृद्घि और नए उपकर से पूरा मासिक बजट बिगड़ जाता है।' एक सेवानिवृत कर्मचारी राजपत विश्वकर्मा का भी ऐसा ही मानना है। विश्वकर्मा कहते हैं, 'लगभग हर चीज (यूटीलिटी बिल से लेकर ट्रेन टिकट) पर सेवा कर लागू है। करों में ये छोटी बढ़ोतरी पेंशनभोगियों की जिंदगी को प्रभावित करती हैं।'
 
अमीरों पर दोहरी मार 
 
भले ही सेवा कर ने मध्यम वर्ग को प्रभावित किया हो, लेकिन अमीरों पर लगाए गए नए कर उनके लिए दोहरी मुश्किल हैं। भले ही सरकार ने कर की दरें नहीं बढ़ाई हैं, लेकिन उसने उन करदाताओं पर अधिभार 12 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है जो साल में एक करोड़ रुपये से अधिक कमाते हैं। मान लीजिए कि आपकी सालाना आय 1.5 करोड़ रुपये है। बजट से पहले आपका सालाना कर 49.89 लाख रुपये होता था। अधिभार में वृद्घि के बाद करदाता को 1.34 लाख रुपये के अतिरिक्त आयकर का भुगतान करना होगा। वित्त मंत्री ने उन लोगों पर भी 10 फीसदी कर लगाया है जो लाभांश के तौर पर 10 लाख रुपये से अधिक की आय हासिल करते हैं। सरकार पहले कंपनियों पर लाभांश वितरण कर लगा चुकी है। हालांकि यह कर 20 फीसदी की फ्लैट रेट से वसूला जाता है, भले ही यह रकम 10 फीसदी या 30 फीसदी के कर दायरे वाले व्यक्ति को मिल रही हो। 
Keyword: income tax, return,,
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