बिजनेस स्टैंडर्ड - मजबूती के लिए तैयार है अशोक लीलैंड
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मजबूती के लिए तैयार है अशोक लीलैंड
टी ई नरसिम्हन / चेन्नई April 15, 2016

वित्त वर्ष 2016 कॉरपोरेट भारत के लिए सुस्त वर्ष रहा। ज्यादातर कंपनियों द्वारा मांग में नरमी, धीमे पूंजीगत खर्च और सुस्त क्षमता इस्तेमाल की वजह से कमजोर सालाना वित्तीय परिणाम दर्ज किए जाने का अनुमान है। लेकिन ऐसी भी कुछ कंपनियां हैं जो स्वयं को मंदी के इस रुझान से अलग साबित कर सकती हैं और वे वर्ष के लिए, खासकर 31 मार्च को समाप्त हुई तिमाही के लिए रिकॉर्ड वृद्घि की घोषणा कर सकती हैं।  इस सीरीज में बिजनेस स्टैंडर्ड ने मंदी को मात देने वाली रणनीतियों को तलाशने के लिए बिक्री को बढ़ाने वाले प्रमुख वाहकों पर विचार किया। सीरीज-1 में यह बताया गया है कि वाणिज्यिक वाहन निर्माता अशोक लीलैंड ने किस तरह से विषम हालात को मात दी।

 
पिछला वित्त वर्ष हिंदुजा के स्वामित्व वाली वाणिज्यिक वाहन (सीवी) निर्माता अशोक लीलैंड के लिए श्रेष्ठï वर्षों में से एक रहा। कंपनी ने वित्तीय रूप से अच्छा प्रदर्शन किया और अपनी बाजार भागीदारी में इजाफा किया। वर्ष 2015-16 में ट्रकों और बसों की बिक्री सालाना आधार पर 34 फीसदी बढ़ी। दिसंबर 2015 में समाप्त हुई 9 महीनों की अवधि में जहां उद्योग की बिक्री 30 फीसदी बढ़ी वहीं, कंपनी की बिक्री में 54 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया।
 
मझोले और भारी वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री मार्च में सालाना आधार पर 32 फीसदी तक और 2015-16 में 41 फीसदी तक बढ़ी। तुलनात्मक रूप से बाजार दिग्गज टाटा मोटर्स ने मार्च के लिए 26.5 फीसदी और 2015-16 के लिए 24 फीसदी की वृद्घि दर्ज की। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफेक्चरर्स (सायम) के अनुसार लीलैंड की सीवी बाजार भागीदारी 2015-16 में बढ़कर 18.5 फीसदी हो गई जो एक साल पहले 15 फीसदी पर थी। वर्ष के दौरान टाटा मोटर्स की बाजार भागीदारी 47.2 फीसदी से घटकर 44.3 फीसदी रह गई और महिंद्रा एंड महिंद्रा की बाजार भागीदारी 25 फीसदी से फिसलकर 24.3 फीसदी पर आ गई। 
 
मझोले एवं भारी सीवी में, लीलैंड की बाजार भागीदारी 27.2 फीसदी से बढ़कर 30.6 फीसदी और टाटा मोटर्स की भागीदारी 57.1 फीसदी से घटकर  54.9 फीसदी पर रही। अशोक लीलैंड ने अपना कर्ज-पूंजी अनुपात 2.44 से घटाकर 0.65 किया है और कार्यशील पूंजी को 1200 करोड़ रुपये तक कम कर सात महीनों में 244 करोड़ रुपये किया। कंपनी ने 1200 करोड़ रुपये की गैर-प्रमुख परिसंपत्तियां बेचीं। 2015-16 के पहले 9 महीनों के लिए एबिटा 11 फीसदी पर रहा जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 6.3 फीसदी था। मुख्य वित्तीय अधिकारी गोपाल महादेवन ने कहा कि जब उद्योग ने तीन साल पहले बिक्री में 50 प्रतिशत की कमी दर्ज की थी तो कंपनी ने अपने व्यवसाय को पुनर्गठित करने का निर्णय लिया। इसने निर्माण लागत और बिक्री खर्च को नियंत्रित कर भरपाई के स्तर पर ध्यान केंद्रित किया। 
 
कंपनी ने कार्यशील पूंजी घटाकर, आय में सुधार लाकर और गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों की बिक्री कर नकदी स्तर को मजबूत बनाया। चुनौतीपूर्ण समय के बावजूद लीलैंड ने टिपर्स, नेपच्यून इंजन, जैनबीयू, बॉस, मित्र और पार्टनर की रेंज लॉन्च की। कंपनी ने अपने बिक्री एवं सर्विस प्वाइंटों की संख्या भी 300 से बढ़ाकर 1300 की है। कंपनी ग्राहकों को यह आश्वासन देने वाली पहली ट्रक निर्माता थी कि उनकी शिकायतों को चार घंटे के अंदर दूर किया जाएगा और वाहन 48 घंटे के अंदर फिर से सड़क पर उपलब्ध होगा। 
 
क्रेडिट सुइस के विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी को उत्तराखंड संयंत्र में मजबूत उत्पादन से लाभ मिला है। लीलैंड का लगभग 40 प्रतिशत उत्पादन इसी संयंत्र से होता है जिसे कर रियायत हासिल है। ये रियायतें वर्ष 2019-20 में समाप्त हो रही हैं। महादेवन का मानना है कि मांग में सुधार और उत्पादन लागत में नरमी जैसे कारकों से कंपनी को मदद मिली है, लेकिन साथ ही शेष उद्योग को भी इनका लाभ मिला है। 
 
जहां उद्योग के लिए 2016-17 में 15-20 फीसदी की वृद्घि का अनुमान है वहीं लीलैंड का प्रदर्शन इससे बेहतर रह सकता है। उसे अच्छे मॉनसून, रुकी पड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के पुन: शुरू होने, आर्थिक सुधार और बीएस-4 ईंधन पर ध्यान केंद्रित करने आदि से अच्छी बढ़त मिलेगी। बाजार भागीदारी में सुधार, मजबूत वृद्घि की उम्मीद को देखते हुए विश्लेषकों ने कंपनी के लिए 2016-17 के आय अनुमान में 10 फीसदी तक की वृद्घि की है। 
 
यह शेयर अपने ऐतिहासिक मूल्यांकन के मुकाबले 25 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहा है। डॉयचे बैंक के विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत बाजार भागीदारी को देखते हुए यह शेयर मौजूदा समय में उचित स्तर पर बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि शेयर की रेटिंग में बदलाव से सुधार की बेहतर उम्मीद और मजबूत मुक्त नकदी प्रवाह की स्थिति का पता चलता है जिससे जोखिम में कमी आएगी। 
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