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'अगले दो साल में वित्तीय बाजार में काफी हलचल दिखेगी'
पुनीत वाधवा /  July 13, 2015

ग्रीस व चीन के घटनाक्रम के चलते कैलेंडर वर्ष 2015 की पहली छमाही वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए काफी हलचल भरी रही है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी ने भी निवेशकों को सतर्क रखा है। ऐसी घटनाओं से जिंसों की कीमतें खास तौर से कच्चा तेल, आम धातुएं और सोने पर भी असर पड़ा है। रोजर होल्डिंग्स के चेयरमैन जिम रोजर ने पुनीत वाधवा को दिए साक्षात्कार में कहा, मुझे लगता है कि अगले कुछ सालों में वैश्विक वित्तीय बाजार दिवालियापन, उतारचढ़ाव और शेयर बाजारों में गिरावट से प्रभावित होगा। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश...

चीन के घटनाक्रम और वैश्विक वित्तीय बाजारों पर इसके निहितार्थ को लेकर आप क्या कहेंगे?

चीन में कई शेयरों में कारोबार बंद हो गया। ऐसे में मार्जिन व उधारी के भुगतान के लिए लोगों को सबकुछ बेचना पड़ा, जिससे वह रकम जुटा सकते थे क्योंकि वे शेयर नहीं बेच पाए। इसी वजह से हम जिंस की कीमतों में बड़ी गिरावट देख रहे हैं। यह कृत्रिम और लोगों की तरफ से बाध्यकारी बिक्री है, जिन्हें रकम जुटानी पड़ी। जहां तक शेयर का सवाल है, इनमें तेजी से बढ़ोतरी हुई और काफी आगे निकल गई। साथ ही उधारी की रकम से इसे खरीदा गया था। लेकिन जब इसमें गिरावट शुरू हुई तो डर और घबराहट बढ़ी। कुछ निवेशक इसे बेचने को बाध्य हुए जबकि अन्य ने घबराहट में बिकवाली की। मैं खरीदता रहा हूं और बाजार में गिरावट के वक्त हमने ऑर्डर दिया था। मैं पिछले कुछ दिनों से खरीदारी कर रहा हूं।

कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि एमएससीआई चाइना इंडेक्स में तेजी अभी शायद खत्म नहीं हुई है। आपकी क्या राय है?

मैं इसके बारे में बहुत नहीं जानता, लेकिन पिछले कुछ दिनों से मैं चीन में शेयर खरीद रहा हूं। मुझे नहींं पता कि मैं कब इसे बेचूंगा।

इन घटनाक्रमों से जिंसों की कीमतें घटीं, खास तौर से आम धातुएं कमजोर हुईं। आगे की राह कैसी है?

जब कृत्रिम बिकवाली बंद हो जाएगी तो मुझे संदेह है कि आम धातुएं बेहतर स्थिति में होंगी। चीनियों ने तांबा और अन्य आम धातुओं के बदले उधारी ली और बड़े मार्जिन की मांग के बाद उन्हें बिकवाली के लिए बाध्य होना पड़ा। ऐसे में मुझे संदेह है कि आने वाले दिनों में हम निचला स्तर देखेंगे।

ऐसा निचला स्तर कब देखने को मिल सकता है?

मुझे लगता है कि यह शायद अभी हो रहा होगा।

क्या आपको लगता है कि अगले कुछ महीनों में वैश्विक बाजार में काफी हलचल देखने को मिलेगी?

हमें लगता है कि हमने बुरा समय कुछ क्षण के लिए देखा। हालांकि अगले कुछ सालों में बड़ी दिक्कतें होंगी। अल्पावधि की ट्रेडिंग के लिहाज से मैं बहुत अच्छा नहीं मानता हूं, लेकिन निश्चित तौर पर मैं जानता हूं कि अगले कुछ सालों में वित्तीय बाजार में कई तरह के समस्याएं आएंगी।

किस तरह की समस्याओं की परिकल्पना कर रहे हैं?

हमें दिवालियापन, काफी उतारचढ़ाव और शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिलेगी। हमें बॉन्ड बाजार व मुद्रा बाजार में हलचल देखने को मिलेगी। अमेरिका में हमने शेयरों में 10 फीसदी की गिरावट भी नहीं देखी थी, लेकिन पांच सालों से ऐसा हो रहा है। हमें अगले साल या दो सालों में कई बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी।

निवेश के लिहाज से कौन से क्षेत्र सुरक्षित हैं?

निवेश के लिए मैं सुरक्षित शब्द का कभी इस्तेमाल नहीं करता। इस वक्त कुछ कृषि जिंस में निवेश किया जा सकता है। चीन, रूस, जापान, उत्तर कोरिया और इथियोपिया। हमने हाल में जिम्बाब्वे में शेयर खरीदे हैं।

निवेश गंतव्य के तौर पर भारत के बारे में आपका क्या नजरिया है? भारत में सुधार की पृष्ठभूमि में क्या आप खरीदारी करेंगे?

भारत में सुधार की पृष्ठभूमि में विगत मेंं हमने शेयर खरीदे थे, लेकिन हमने उसे बेच दिया क्योंकि यहां सुधार नजर नहीं आया। कुछ भी नहींं हुआ है।

लेकिन ज्यादातर लोग आशान्वित हैं कि सुधार होंगे और अभी सरकार के शुरुआती दिन हैं?

यह सही है और कुछ लोग भारत में रकम अर्जित करेंगे। एक साल से नरेंद्र मोदी की सरकार है और वस्तुत: कुछ भी नहीं हुआ है। चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने कहा था - उन्हें पता है कि वह क्या कर रहे हैं। पहले वह एक राज्य का संचालन कर रहे थे, ऐसे में अब क्या समस्या है? उन्हें नहीं पता कि क्या किया जाना चाहिए और वह इसे नहीं कर सकते। कुल मिलाकर हमने भारत में अपना शेयर बेच दिया।

इस तरह की खबरें हैं कि ग्रीस की स्थिति खराब होने से रुपया दबाव में आ सकता है। आपकी राय?

इस वक्त मैं रुपये के बारे में बहुत कुछ नहीं जानता, लेकिन दूसरे क्षेत्रों के मुकाबले भारत के ऊपर अच्छा खासा कर्ज है। रुपये के मुकाबले दूसरी मुद्राएं बेहतर स्थिति में होंगी।

Keyword: greece, economic crisis, finance secetary, europe, bank,,
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