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फार्मा शेयर: गिरावट ने दिया अच्छा मौका
उज्ज्वल जौहरी / नई दिल्ली December 01, 2013

सन फार्मा, ल्यूपिन और सिप्ला जैसी प्रमुख फार्मा कंपनियों के शेयरों में पिछले दो महीों में बड़ी गिरावट आई है। अक्टूबर के मध्य में अपनी 52 सप्ताह की ऊंचाई के बाद सन फार्मा 12 फीसदी से अधिक गिर चुका है और ल्यूपिन में 9 फीसदी से अधिक जबकि सिप्ला में लगभग 15 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। यह गिरावट मुख्य तौर पर निवेशकों द्वारा अन्य क्षेत्रों के शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में शामिल किए जाने की वजह से आई है। बुनियादी आधार पर इस गिरावट की कोई वजह नहीं दिख रही है और सितंबर 2013 की तिमाही के दौरान इन कंपनियों ने अच्छे वित्तीय परिणाम दर्ज किए हैं।

सन फार्मा
सन फार्मा सभी बाजारों में मजबूत विकास परिदृश्य के साथ डटी हुई है। उसकी अमेरिकी सहायक इकाई टारो (कुल बिक्री का एक-चौथाई) ने सितंबर तिमाही में वापसी दर्ज की। टारो को नाइस्टेटिव ट्रायमसिनोलोन जैसे प्रमुख डर्मेटोलॉजी उत्पादों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा की वजह से जून 2013 की तिमाही में दबाव का सामना करना पड़ा। फॉच्र्यून ब्रोकिंग के हितेश महीदा का कहना है कि टारो के वित्तीय परिणाम से संकेत मिलता है कि इसने अन्य उत्पादों में कुछ कीमत वृद्घि की है। 1 नवंबर को समाप्त हुए सप्ताह के लिए नोमुरा की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि नाइस्टेटिन ट्रायम क्रीम में टारो की बाजार भागीदारी लगभग 60 फीसदी पर मजबूत हुई है जो साप्ताहिक आधार पर 70 आधार अंक तक अधिक है। अक्टूबर में टॉपिकोर्ट स्प्रे और कैलसाइट्रीन ऑइन्टमेंट के साथ डर्मेटोलॉजी सेगमेंट में टारो के एनडीए लॉन्च से लगातार मजबूती मिली है।

टारो के 20 करोड़ डॉलर के ताजा शेयर पुनर्खरीद प्रस्ताव से भी आय को मजबूती मिलनी चाहिए। एचएसबीसी के विश्लेषकों का मानना है कि अधिकतम ऑफर कीमत (97.5 डॉलर प्रति शेयर) पर ऑफर के पूर्ण अभिदान को देखते हुए टारो के लिए वित्त वर्ष 2014 के आय अनुमानों में 5 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है। एचएसबीसी के विश्लेषक 725 रुपये के कीमत लक्ष्य के साथ इस शेयर के लिए अपनी 'ओवरवेटÓ रेटिंग पर कायम हैं।

आईएमएस डेटा से पता चलता है कि सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर 17 फीसदी की बढ़त के बाद सन फार्मा का घरेलू व्यवसाय अक्टूबर में सालाना आधार पर 19 फीसदी बढ़ा जो इस उद्योग में श्रेष्ठï है। सन की अन्य अमेरिकी सहायक इकाई यूआरएल को भी एंटी- बैक्टीरियल डॉक्सीसाइक्लाइन की आपूर्ति की वजह से लगातार मजबूती मिलने की संभावना है। अगस्त 2013 में एक्सक्लूसिविटी के आधार पर एंटी-डायबेटिक प्रानडिन के लॉन्च से एक्सक्लूसिविटी के पहले 6 महीनों के दौरान राजस्व में 3 करोड़ डॉलर और मुनाफे में 1.5 करोड़ डॉलर हासिल होने की संभावना है। कुल मिला कर विश्लेषकों का मानना है कि सन की ईपीएस में वित्त वर्ष 2014 में 35 फीसदी से अधिक और वित्त वर्ष 2015 में अन्य 15 फीसदी की वृद्घि होगी।

ल्यूपिन
कंपनी ने सितंबर तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया। नई दवा मूल्य निर्धारण नीति की वजह से जून तिमाही में सुस्ती के बाद कंपनी का घरेलू व्यवसाय (कुल राजस्व का 25 फीसदी) सितंबर तिमाही में 9 फीसदी मजबूत हुआ। ल्यूपिन के प्रबंध निदेशक नीलेश गुप्ता को कुछ तिमाहियों में घरेलू वृद्घि 18-20 फीसदी रहने का अनुमान है।
अमेरिकी व्यवसाय का योगदान कुल राजस्व में 42 फीसदी का है और इसमें तेजी बरकरार है। इसका मौजूदा पोर्टफोलियो तेजी से बढ़ रहा है और ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव लिपिड कंट्रोल ड्रग में विस्तार के साथ साथ ऑफ्थलमोलोजी, डर्मेटोलॉजी में वृद्घि से इसमें मजबूती आने की संभावना है। जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों का अनुमान है कि ल्यूपिन की अमेरिकी जेनेरिक बिक्री वित्त वर्ष 2014-16 के दौरान 23 फीसदी की सीएजीआर से बढ़ेगी। अनुबंध निर्माण में तेजी एवं कई अन्य उत्पादों के लॉन्च की वजह से ल्यूपिन का जापानी राजस्व भी वित्त वर्ष 2014 की दूसरी छमाही में मजबूत रहने का अनुमान है। इस राजस्व में जून तिमाही में सालाना आधार पर 12 फीसदी और सितंबर तिमाही में 6 फीसदी तक की कमी दर्ज की गई। इन सब की वजह से ल्यूपिन को वित्त वर्ष 2014 और वित्त वर्ष 2015 में ईपीएस में 19 फीसदी की वृद्घि दर्ज करने में मदद मिलनी चाहिए।

सिप्ला
हालांकि घरेलू बाजार में सिप्ला की मजबूत वृद्घि (सितंबर तिमाही में 11.6 फीसदी) बरकरार है , लेकिन कंपनी ने निर्यात बाजारों के लिए अपनी रणनीति में बदलाव किया है और वह स्वयं ही इस दिशा में आगे बढ़ रही है। बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच के विश्लेषकों का मानना है कि सिप्ला आपूर्ति चेन मॉडल से फ्रंट-ऐंड मॉडल पर अधिक जोर दे रही है जिसके लिए अधिक निवेश एवं कम पूंजीगत खर्च की जरूरत है। हालांकि इससे अल्पावधि में मार्जिन प्रभावित होगा, लेकिन इससे मुक्त नकदी प्रवाह (एफसीएफ) सृजन में मदद मिलेगी। विश्लेषकों ने इस बात पर जोर दिया है कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2013 में 520 करोड़ रुपये का एफसीएफ हासिल किया और वित्त वर्ष 2013-16 के दौरान इसके बढ़ कर 3300 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

  
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