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राजन की सूची में कम विकसित गुजरात!
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली September 26, 2013

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी मतदाताओं को लुभाने के लिए गुजरात के विकास की दुहाई देते रहे हैं। लेकिन आज वित्त मंत्रालय की ओर से विकास के आधार पर जारी 28 राज्यों की सूची में गुजरात को 12वें स्थान पर उत्तराखंड से भी नीचे देखकर मोदी को बड़ा झटका लगा होगा। गुजरात को पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मणिपुर, नागालैंड, जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों के साथ कम विकसित राज्यों की सूची में रखा गया है।

दिलचस्प है कि अपनी जनसभाओं में मोदी जिन दो अन्य राज्यों- मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विकास मॉडल की प्रशंसा कर रहे हैं उन्हें तो बिहार, ओडिशा, झारखंड, असम और उत्तर प्रदेश के साथ सबसे कम विकसित राज्यों की सूची में डाल दिया गया है। 'कम विकास सूचकांकÓ नाम से जारी इस सूची का फॉर्मूला रघुराम राजन की अगुआई वाली एक समिति ने तब दिया था, जब राजन वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार थे। समिति द्वारा प्रस्तावित नया विकास सूचकांक 10 उप-घटकों का औसत है। ये उप-घटक हैं प्रति माह प्रति व्यक्ति खपत, व्यय, शिक्षा, स्वास्थ्य, घर में सुविधाएं, गरीबी दर, महिला साक्षरता, अनुसूचित जाति व जनजाति की आबादी, शहरीकरण की दर, वित्तीय समावेश और कनेक्टिविटी। इस सूचकांक का उद्देश्य है राज्यों को केंद्र से आवंटित होने वाली रकम पर फैसला करना।

बिहार लंबे समय से विशेष राज्य का दर्जा मांग रहा है, जिससे उसे केंद्र से ज्यादा वित्तीय मदद मिल सके। इस रिपोर्ट से यह उद्देश्य भी पूरा हो जाएगा, जिसके गहरे राजनीतिक परिणाम होंगे। हालांकि वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि ये महज सिफारिशें हैं और अंतिम फैसला विभागों, मंत्रालयों और योजना आयोग की प्रतिक्रिया के बाद ही लिया जाएगा।

अगर रिपोर्ट में दिए गए सुझाव मंजूर हो गए तो विशेष राज्य की मौजूदा परिभाषा पूरी तरह बदल जाएगी। अभी सुदूर इलाकों और पहाड़ी इलाकों वाले राज्यों को विशेष दर्जा दिया जाता है। सबसे कम विकसित राज्यों की सूची में बिहार दूसरे नंबर पर है जबकि ओडिशा इस सूची में सबसे ऊपर है। इस तरह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन एक ही झटके में जनता दल (यूनाइटेड) और बीजू जनता दल दोनों को उससे हाथ मिलाने के लिए आसानी से मना
सकती है।

रिपोर्ट की सिफारिशों के अनुसार 28 राज्यों में से प्रत्येक को केंद्र के कुल कोष का 0.3 फीसदी मिलेगा। बाकी बचे 91.6 फीसदी कोष में से तीन-चौथाई राज्यों की जरूरत के अनुसार आवंटित करने और एक-चौथाई प्रदर्शन के आधार पर आवंटित करने की सिफारिश की गई है।

  
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