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लंबी होगी पीएफ की चादर
ज्यादा कामगारों को पीएफ का फायदा दिलाने के लिए नियम में बदलाव की सिफारिश
नेहा पांडेय / मुंबई November 07, 2009

भविष्य की चिंता में परेशान लाखों कामगारों को जल्द ही राहत की सांस मिल सकती है।

दरअसल कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) कुछ कानूनी तब्दीली चाहता है ताकि अधिक से अधिक कर्मचारियों को भविष्य निधि (पीएफ) का फायदा मिल सके। इसके लिए उसने श्रम मंत्रालय के पास प्रस्ताव भी भेजा है, जिसके मुताबिक 6,500 के बजाय अधिकतम 10,000 रुपये वेतन पाने वाले कर्मचारियों का पीएफ काटा जाना चाहिए।

ईपीएफओ ने जिन बदलावों की सिफारिश की है, उनमें ऐसी कंपनियों को भी कर्मचारी भविष्य निधि एवं मिश्रित प्रावधान अधिनियम, 1952 के दायरे में लाना है, जिनमें कम से कम 10 कर्मचारी काम कर रहे हैं। अभी तक ऐसी कंपनियां ही इस कानून के दायरे में आती हैं, जिनमें कम से कम 20 कर्मचारी काम करते हैं।

इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया, 'इस अधिनियम के मौजूदा प्रावधानों की वजह से लाखों कामगार पीएफ के दायरे में आने से रह जाते हैं। इस वजह से हमने सरकार को वेतन की सीमा बढ़ाने और किसी कंपनी में कर्मचारियों की तय संख्या कम करने की सिफारिश सरकार से की है।'

संगठित श्रम क्षेत्र में अभी तकरीबन 30 करोड़ कामगार हैं, जिनमें केवल 4 करोड़ ईपीएफओ कानूनों के दायरे में आते हैं यानी पीएफ का फायदा इतने कामगारों को ही मिलता है। सूत्रों के मुताबिक यदि इस सिफारिश को संसद की मंजूरी मिल जाती है तो संगठित क्षेत्र में पीएफ का लाभ उठाने वाले कर्मचारियों की संख्या में 15 करोड़ का इजाफा हो जाएगा, जो संगठित क्षेत्र के कुल कामगारों का 50 फीसदी होगा। फिलहाल इस प्रस्ताव को मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार है।

हालांकि टीमलीज सर्विसेज के सह संस्थापक और चेयरमैन मनीष सभरवाल के मुताबिक संगठित क्षेत्र के कामगारों का जो आंकड़ा बताया गया है, उसमें बड़ी तादाद राज्य और केंद्र सरकारों के कर्मचारियों की है। वह कहते हैं, 'ईपीएफओ को पहले सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों को इस दायरे में लाना चाहिए। इसके बाद ही आधर बढ़ाने के बारे में सोचना चाहिए।'

फिलहाल कोई भी नियोक्ता अपने कर्मचारी के मूल वेतन और महंगाई भत्ते का कुल 12 फीसदी कर्मचारी भविष्य निधि को देता है। लेकिन इसके लिए मूल वेतन और महंगाई भत्ता 6,500 रुपये या उससे कम होना चाहिए।

ऐसे में अक्सर कंपनियां ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों के तमाम भत्ते भी एकमुश्त वेतन में शामिल कर देते हैं और उनका अलग से जिक्र नहीं करते। इस तरह मूल वेतन और महंगाई भत्ते का आंकड़ा 6,500 रुपये से अधिक हो जाता है, जिसकी वजह से इन कंपनियों को पीएफ के फेर में नहीं पड़ना होता है।

सूत्रों के मुताबिक यदि सरकार इस सीमा को बढ़ाकर 10,000 रुपये कर देती है, तो ऐसे लाखों कर्मचारियों को पीएफ का लाभ मिल जाएगा। इसके अलावा महंगाई की वजह से वेतन में पिछले कुछ सालों में अच्छा खासा इजाफा हुआ है, इसलिए भी इस सीमा को बढ़ाने की बात ईपीएफओ कह रहा है।

पीएफ के लिए मूल वेतन एवं महंगाई भत्ते की बढ़े सीमा
6,500 के बजाय 10,000 रुपये करने की सिफारिश
न्यूनतम 10 कर्मचारियों वाली कंपनियां भी दें पीएफ
महंगाई बढ़ने से बढ़े वेतन, इसलिए भी बदलाव ज़रूरी
श्रम मंत्रालय के पास पहुंचीं ईपीएफओ की सिफारिशें
15 करोड़ कामगारों को मिल सकता है इससे फायदा

  
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