| टाटा को आयुर्वेदिक दवा | | आयुर्वेदिक चिकित्सा में कारोबार की संभावनाएं दिखीं तो टाटा समूह ने भी कर लिया इसमें उतरने का फैसला | | | पी बी जयकुमार / मुंबई November 07, 2009 | | | | |
योग गुरु बाबा रामदेव और टाटा समूह में क्या समानता है।
रामदेव की पहचान योग से जुड़ी है तो टाटा समूह की कारोबार से। लेकिन बाबा रामदेव और टाटा समूह दोनों आयुर्वेद के क्षेत्र में अपने झंडे गाड़ना चाहते हैं। टाटा समूह इसकी तैयारी शुरू कर चुका है।
बाबा रामदेव तीर्थनगरी हरिद्वार में पतंजलि योग पीठ के रूप में दुनिया के सबसे बड़े आयुर्वेद केंद्रों में से एक की बुनियाद डाल चुके हैं। इसमें आयुर्वेद के जरिये इलाज, शोध की व्यवस्था और एक आयुर्वेद विश्वविद्यालय बनना है।
निजी क्षेत्र में देश के इस सबसे बड़े कारोबारी समूह ने एक गैर सरकारी संस्था (एनजीओ) एफआरएलएचटी के साथ गठजोड़ किया है। यह संस्था पुराने नुस्खों के जरिये इलाज को प्रोत्साहित कर रही है। टाटा समूह की योजना इस एनजीओ के साथ मिलकर बेंगलुरु के निकट येलाहांका में इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ आयुर्वेद इंटीग्रेटेड मेडिसिन (आईआईएआईएम) की स्थापना करने की है।
आयुर्वेद केंद्र को कई स्तरों पर साधन संपन्न बनाने की योजना है। इसमें प्रशिक्षित आयुर्वेदिक चिकित्सकों, साइकोथेरेपिस्ट और योग विशेषज्ञ होंगे। इसमें शोध एवं विकास केंद्र और दवा उत्पादन इकाई के अलावा 100 बेड वाला एक आयुर्वेद और योग अस्पताल भी बनाया जाएगा। टाटा समूह का सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट इस परियोजना के लिए 34 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम दे चुका है।
कुछ महीने पहले ही एक अन्य कारोबारी दिग्गज यश बिड़ला ने आयुर्वेद के जरिये इलाज करने वाली कंपनी केरल वैद्यशाला में भारी हिस्सेदारी खरीदी और इसका नाम बदलकर बिड़ला केरल वैद्यशाला कर दिया। यह समूह देश भर में कारोबार फैलाने के लिए 50 करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश करेगा। आयुर्वेद का देश में 8,000 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार होता है, जिसमें हर साल 20 फीसदी का इजाफा हो रहा है।
आयुर्वेद में निवेश करने की तैयारी में टाटा समूह
रामदेव के योग केंद्र की तर्ज़ पर आयुर्वेद केंद्र
बेंगलुरु के पास एनजीओ के सहयोग से बनेगा केंद्र
यश बिड़ला की हिस्सेदारी आयुर्वेदिक कंपनी में
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