| एफआईपीबी, राजस्व विभाग में ठनी | | ट्रीटी शॉपिंग के तहत विदेशी निवेश के प्रस्ताव पर हुई तनातनी | | | सुरजीत दासगुप्ता और आशीष सिन्हा / नई दिल्ली November 06, 2009 | | | | |
मॉरिशस के रास्ते भारत में आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रस्तावों को राजस्व विभाग की ओर से रद्द करने पर विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) ने नाराजगी जाहिर की है।
एफआईपीबी का कहना है कि ऐसा करने से देश में विदेशी निवेश पर असर पड़ रहा है। यह मामला एफआईपीबी के समक्ष 30 अक्टूबर को आया, जब इरिडियम 1 वी मॉरिशस होल्डिंग्स लिमिटेड ने अपनी सहायक इकाई इंडिया वैल्यू फंड के जरिए भारत में 2,500 करोड़ रुपये का निवेश करने का प्रस्ताव दिया।
भारत के मध्यम आकार और भारत केंद्रीय कंपनियों, जिनका सालाना कारोबार 10 करोड़ डॉलर के करीब है, उन्हें ध्यान में रखते हुए इस फंड का गठन किया गया है। राजस्व विभाग को इस तरह के प्रस्ताव को ट्रीटी शॉपिंग में शामिल होने के चलते रद्द करता रहा है।
बोर्ड का कहना है कि भारत और मॉरिशस के बीच दोहरा कराधान परिहार संधि की गई है और अब तक लागू है और इस पर कोई विवाद भी नहीं है। राजस्व विभाग इस तरह के प्रावधान के चलते देश में मॉरिशस के रास्ते आने वाले सभी निवेश को नहीं रोकना चाहिए।
इसे देखते हुए एफआईपीबी ने नीतिगत निर्णय लिया है कि इस तरह की बाधाओं को वह नरअंदाज करेगा। गौरतलब है कि राजस्व विभाग ट्रीटी शॉपिंग समझौते में बदलाव लाने का दबाव डालता रहा है, लेकिन मॉरिशस सरकार इस तरह का बदलाव नहीं चाहती है। राजस्व विभाग का कहना है कि इस तरह के समझौते से भारत सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
ट्रीटी शॉपिंग उसे कहते हैं जिस देश के साथ भारत की दोहरा कराधान परिहार संधि हो और उस देश के जरिए कंपनियों में निवेश किया जाता है। इस करार के चलते उक्त देश से आने वाले निवेश पर बहुत कम कर लगता है। मॉरिशस इस संधि का अच्छा उदाहरण है। यही वजह है कि मॉरिशस के रास्ते भारत में खासा निवेश किया जाता है।
वर्ष 2000 से भारत में होने वाले कुल विदेशी निवेश का करीब 40 फीसदी इस रूट के जरिए ही हुआ है। राजस्व विभाग ने इस आधार करीब दर्जन भर मामलों को रोक कर रखा, जिनमें से कुछ को रद्द कर दिया गया, जबकि कुछ को एफआईपीबी की मंजूरी दी गई।
उदाहरण के रूप में अगस्त की एफआईपीबी की बैठक में गोल्डमैन सैक्स के भारत में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के प्रस्ताव को रद्द कर दिया गया। राजस्व विभाग ने इस प्रस्ताव का यह कहते हुए विरोध किया था कि इसे मंजूरी देने का मतलब है कि ट्रीटी शॉपिंग को मंजूरी देना।
पिछले साल राजस्व विभाग ने विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड को जापान टोबैको इंटरनैशनल मॉरिशस प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्ताव को रद्द करने का सुझाव दिया था। इस मामले में जेटीआई मॉरिशस जेटीआई इंडिया में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए 10 करोड़ डॉलर का निवेश करना चाह रही थी।
एफआईपीबी ने अनलजीत सिंह और असीम घोष की कंपनी की ओर से वोडाफोन-एस्सार में अल्पांश हिस्सेदारी बेचने को लेकर भी नजर टेढ़ी की थी। इस मामले की सुनवाई इस साल के अक्टूबर अंत में हुई है। इस मामले में राजस्व विभाग को ट्रीटी शॉपिंग को लेकर आपत्ति थी।
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