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देश की तरक्की में आगे मगर खुद पीछे
देश के जीडीपी में उत्तरी राज्यों का शानदार योगदान रहा है मगर खुद के आर्थिक विकास में वे पीछे रह गए हैं
शिशिर प्रशांत / देहरादून November 06, 2009

देश की तरक्की में उत्तर भारतीय राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है।

वर्ष 2007-08 के दौरान देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में उत्तरी राज्यों की भागीदारी 27.5 प्रतिशत रही, हालांकि इस अवधि में इन राज्यों की आर्थिक विकास दर राष्ट्रीय औसत विकास से कम रही है।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की उत्तर भारत में जीडीपी विकास पर आधारित रिपोर्ट के दूसरे संस्करण में दिए गए विश्लेषण के मुताबिक वर्ष 1999-2000 से वर्ष 2007-08 के बीच उत्तर भारत की वार्षिक विकास दर 6.2 प्रतिशत रही, जबकि उस दौरान पूरे देश की औसत विकास दर 6.5 फीसदी थी।

उत्तर भारत के लिए सीआईआई के अध्यक्ष हरपाल सिंह ने कहा कि उत्तरी राज्यों ने प्राथमिक और तृतीयक क्षेत्रों में औसत से कम प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि उत्तर भारत में प्राथमिक क्षेत्र की विकास दर औसत से कम रहने की एक प्रमुख वजह उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्यों की धीमी विकास दर रही। पूरे उत्तर भारत की प्राथमिक क्षेत्र में इन राज्यों की हिस्सेदारी 57.5 प्रतिशत है।

सिंह ने कहा कि देश के उत्तरी हिस्से में एक तरफ तो कृषि जैसे पारंपरिक क्षेत्र में मौजूद मौके को सही तरीके से नहीं भुनाया गया और दूसरी तरफ सेवा क्षेत्र का भी उतनी तेजी से विकास नहीं हो पाया, जितनी तेजी से अन्य राज्यों में हुआ है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि प्राथमिक और तृतीय क्षेत्रों में तो उत्तरी राज्यों ने औसत के कम तरक्की की है, लेकिन द्वितीयक क्षेत्र में बढ़िया प्रगति हुई है।

इसमें निर्माण क्षेत्र में हुए तेज विकास का महत्वपूर्ण योगदान है। उत्तर भारत के राज्यों ने जिन अन्य क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है, उनमें परिवहन, भंडारण एवं संचार, बैंकिंग एवं बीमा, अचल संपत्ति और कारोबारी सेवाएं शामिल हैं। निर्माण, परिवहन और भंडारण एवं संचार जैसे उप क्षेत्र उत्तर भारतीय राज्यों की आर्थिक प्रगति में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले 5 क्षेत्रों में शामिल हैं।

सिंह ने कहा कि वर्ष 1999-2000 से वर्ष 2007-08 के दौरान उत्तरी राज्यों के सकल घरेलू उत्पाद के विकास में इन उप क्षेत्रों की भूमिका 12.8 प्रतिशत से बढ़कर 20.4 प्रतिशत हो गई। उल्लेखनीय है पिछले कुछ वर्षों के दौरान उत्तर भारत के तमाम राज्यों के जीडीपी विकास में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान लगातार कम हुआ है।

उत्तराखंड में जीडीपी में हिस्सेदारी के मामले में सबसे तेज प्रगति द्वितीयक क्षेत्र की हुई, जो 15 प्रतिशत के स्तर पर जा पहुचा है। इसी तरह हरियाणा में तृतीयक क्षेत्र ने बाजी मारी है, जिसका योगदान 10 प्रतिशत रहा। 

रिपोर्ट के मुताबिक क्षेत्रीय जीडीपी विकास के मामले में चंडीगढ़ में व्यापार, होटल और रेस्तरां उप खंड ने बाजी मारी, जबकि दिल्ली में अचल संपत्ति क्षेत्र विकास दर के मामले में पूरे देश में तीसरे स्थान पर रहा और हरियाणा में यह उप खंड पूरे देश में दूसरे स्थान पर रहा। हिमाचल प्रदेश में कृषि क्षेत्र ने बाजी मारी, जबकि उत्तराखंड में निर्माण क्षेत्र ने सबसे तेज प्रगति की। 

  
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