| जो गन्ने के दाम दिलाएगा वही किसान वोट पाएगा | | वीरेन्द्र सिंह रावत / लखनऊ November 06, 2009 | | | | |
भले ही उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों तक गन्ने की आपूर्ति को लेकर गतिरोध बरकरार है, लेकिन राज्य की कॉपरेटिव शुगरकेन सोसायटीज ने उस पार्टी का समर्थन करने की घोषणा की है जो उनके हितों के लिए आवाज उठाएगी।
यूपी कॉपरेटिव शुगरकेन सोसायटीज के चेयरमैन श्रीकांत सिंह ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'हम किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़े हुए हैं, लेकिन जो कोई पार्टी हमारी आवाज उठाएगी, हम उसका पूरा सहयोग करेंगे।'
गन्ने की कीमत को लेकर पैदा हुआ गतिरोध जारी है। हालांकि राज्य सरकार ने सामान्य किस्म के गन्ने के लिए 165 रुपये प्रति क्विंटल के राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) की घोषणा की है, लेकिन किसान 280 रुपये प्रति क्विंटल की मांग पर अड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा, 'खुदरा चीनी की कीमतें पिछले साल 17 रुपये के आसपास थीं और एसएपी 140 रुपये था। इस साल चीनी की कीमतें लगभग दोगुनी होकर 36 रुपये पर पहुंच गई हैं। इसलिए किसानों को 280 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से गन्ने की कीमत मिलनी चाहिए।'
सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर इस मुद्दे को नहीं सुलझाया जाता है तो हम 13 नवंबर को सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन का आयोजन करेंगे। राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) ने कल मेरठ में एक 'महापंचायत' आयोजित की और घोषणा की कि अगर सरकार एसएपी में संशोधन नहीं करती है तो उत्तर प्रदेश में 10 नवंबर से एक व्यापक विरोध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
आरएलडी ने गन्ने के लिए 130 रुपये प्रति क्विंटल की फेयर ऐंड रिम्यूनरेटिव प्राइस (एफआरपी) घोषित किए जाने के लिए केंद्र पर भी निशाना साधा। राज्य सरकार ने राज्य में किसी भी कानून व्यवस्था की स्थिति को टालने और किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए निजी मिलरों द्वारा कच्ची चीनी के आयात को प्रतिबंधित कर दिया है।
गन्ने की पेराई, जिसमें पहले ही विलंब हो चुका है, के जल्द शुरू होने की संभावना नहीं दिख रही है। हालांकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ सहकारी मिलें 9 नवंबर तक गन्ने की पेराई शुरू कर सकती हैं, क्योंकि इसे लेकर बातचीत चल रही है और किसानों को एसएपी को लेकर फायदा मिल सकता है।
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