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अशोक लीलैंड : मुश्किल दौर से बाहर
दिशासूचक
शोभना सुब्रमण्यन /  November 06, 2009

कंपनी ने बाजार की हिस्सेदारी पाने के लिए बेहतर प्रदर्शन किया और अर्थव्यवस्था में सुधार के मौके को भुनाने में कंपनी पीछे नहीं रहने वाली।

घरेलू व्यावसायिक वाहनों के बाजार में तेजी आने से ट्रक और बस निर्माता अशोक लीलैंड (एएल) को पिछले कुछ महीने में कीमतों में बढ़ोतरी से काफी मदद मिली है। जून की तिमाही की तुलना में सितंबर की तिमाही के दौरान कारोबार में 87 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई। अब यह बड़ी आसानी से कहा जा सकता है कि चेन्नई की कंपनी के लिए बुरा दौर अब खत्म हो चुका है।

प्रबंधन को यह यकीन है कि कारोबार में लगभग 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है वहीं इसमें पहले एक अंक की वृद्धि की ही बात की जाती थी। एएल 5-10 फीसदी तक की बाजार हिस्सेदारी पाने में सक्षम थी और कंपनी की कमाई में उम्मीद से कहीं ज्यादा बेहतर प्रदर्शन हुआ और इससे बाजार में इस कंपनी को लेकर एक आश्चर्य का माहौल बना।

तिमाही के दौरान शुद्ध बिक्री में सालाना 15.5 फीसदी तक की गिरावट हुई और यह 1,578 करोड़ रुपये रहा। परिचालन मुनाफा मार्जिन (ओपीएम) 10.5 फीसदी के साथ अनुमान से कम रहा हालांकि इसमें सालाना 2.2 फीसदी का उछाल आया।

इसका मतलब यह है कि परिचालन लाभ में महज 8 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई और यह 166 करोड़ रुपये हो गया। असंतोष की बात यह थी कि शुद्ध लाभ में 36.6 फीसदी तक का उछाल आया और यह 89.5 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि इस पर उम्मीद से अधिक अनुमानित कर दर और उम्मीद से कम दूसरी आय का असर भी दिखा।

अर्थव्यवस्था में सुधार से व्यावसायिक वाहनों के लिए तीन महीने पहले के मुकाबले नजरिया भी बेहतर हुआ और ऐसे में एएल को बदलते माहौल को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश करनी चाहिए। कंपनी को जेएनएनयूआरएम योजना के तहत पहले ही लगभग 5000 बसों और इसके अलावा राज्य परिवहन निगम के अधीन 3,500 इकाइयों के लिए ऑर्डर मिला है।

वर्ष 2010-11 में एएल को उम्मीद है कि इससे लगभग 8,300 करोड़ रुपये राजस्व के तौर पर प्राप्त होगा। इससे कंपनी लागत पर नियंत्रण करने में सक्षम होगी और अपने भंडार का प्रबंधन कर सकती है और इसका मुनाफा बढ़कर 400 करोड़ रुपये तक हो जाएगा।

निश्चित तौर पर अब बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि कंपनी का प्रदर्शन मौजूदा साल में कैसा रहता है और शुद्ध लाभ का अनुमानित दायरा 275 करोड़ रुपये से 350 करोड़ रुपये के बीच रहता है।

एएल के स्टॉक का मौजूदा कारोबार 49 रुपये पर हो रहा है और अगर मुनाफा में ज्यादा इजाफा होता है तो यह 2010-11 की अनुमानित कमाई के प्राइस-अर्निंग मल्टीपल का 14 गुना होगा। विश्लेषकों का ऐसा यकीन है कि यह महंगा है।

यूनिटेक : कारोबार में फिर से वापसी

सितंबर की तिमाही में यूनिटेक के नतीजे बेहद असंतोषजनक रहे। कंपनी के राजस्व और मुनाफे का प्रदर्शन उम्मीद से कहीं कम था।

राजस्व में सालाना 48 फीसदी की कमी आई जबकि कमाई में 50 फीसदी तक की कमी आई। क्रमिक आधार पर विश्लेषकों ने जो उम्मीद की थी आंकड़ें उससे भी कम थे। यूनिटेक के शुद्ध मुनाफे में 9 फीसदी की बढ़त हुई। कंपनी अब फिर से सक्रिय हो गई है।

विश्लेषकों ने बताया कि कंस्ट्रक्शन साइट पर औसत कर्मचारियों की संख्या में 85 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई।  प्लेसमेंट के जरिये कंपनी ने 4,400 करोड़ रुपये की उगाही की। कंपनी का बैलेंस शीट अब बेहतर  है और सितंबर के अंत में कर्ज में गिरावट आई है और यह 6,600 करोड़ रुपये है।

कंपनी ने 210 लाख वर्ग फीट में से 100 लाख वर्ग फीट की पूर्व बिक्री की। इसे मौजूदा साल की पहली छमाही में लॉन्च किया था जिसमें से यूनिहोम प्रोजेक्ट के लिए 50 लाख वर्ग फीट देने की बात थी। इसने छह महीने में सितंबर तक 4,000 करोड रुपये तक की बिक्री की और इसका फायदा आने वाली तिमाहियों में भी मिलेगा।

यूनिटेक मुंबई में कुछ नए प्रोजेक्ट के बारे में सोच रही है और मुमकिन है कि परेल और चेंबुर जैसे क्षेत्रों में कुछ लॉन्च हो सकता है। विश्लेषकों का ऐसा मानना है कि क्रियान्वयन तेजी से हो सकता है हालांकि प्रबंधन अगले तीन सालों में लगभग 300 लाख वर्ग फीट का लक्ष्य रख रही है।

स्लम पुनर्विस्थापन योजना के लिए कंपनी ने मुंबई में संयुक्त उपक्रम के तहत जमीन ली है। स्टॉक का कारोबार 85 रुपये की मौजूदा कीमत पर हो रहा है।

  
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