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जीवन बीमा कंपनियों के घाटे में आई कमी
शिल्पी सिन्हा / मुंबई November 04, 2009

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में जीवन बीमा कंपनियां अपना घाटा कम करने में सफल रही हैं। इसका श्रेय कुछ हद तक नई पॉलिसियों की बिक्री में आई गिरावट को दिया जा सकता है।

एसबीआई लाइफ जैसी कंपनियों को सितंबर में समाप्त हुई छमाही में घोषित परिणामों में लाभ दिखने की प्रमुख वजह उनके निवेश मूल्य, खास तौर से जिन शेयरों में उन्होंने निवेश किया हुआ है उनकी कीमतों में हुई वृध्दि रही है।

इसके अतिरिक्त जीवन बीमा कंपनियों ने अपनी शाखाओं का पुनर्गठन कर खर्चे कम किए हैं जिससे उत्पादकता का स्तर बढ़ा है और नये बाजारों में विस्तार पर लगाम लगा है। घाटे में आई गिरावट में बिक्री में हुई कमी का भी योगदान रहा है क्योंकि बीमाकर्ताओं को नियामक द्वारा निर्धारित सॉल्वेंसी मार्जिन को बरकरार रखने के लिए नये कारोबार का अंडरराइटिंग करते वक्त अतिरिक्त पूंजी अलग रखनी पड़ती है।

सॉल्वेंसी मार्जिन किसी जीवन बीमा योजना का 150 प्रतिशत होता है। इसलिए 100 रुपये की पॉलिसी के लिए बीमा कंपनी को 150 रुपये अलग रखने होते हैं। पिछले साल बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण ने कई बीमा योजनाओं के लिए सॉल्वेंसी मार्जिन घटा दिया था जिनमें यूनिट संबध्द बीमा योजना (यूलिप) भी शामिल थी।

कुल जीवन बीमा योजनाओं की बिक्री में यूलिप की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत की है। नियामक द्वारा उठाए गए इस कदम के परिणामस्वरूप पूंजी जरूरतों में कमी आई। चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों के नए पॉलिसियों से संग्रहित प्रीमियम में 14.67 प्रतिशत की गिरावट आई। असूचीबध्द बीमा कंपनियां अपने तिमाही आंकड़े जारी नहीं करती है।

बैंक एश्योरेंस के सहारे और निवेश से होने वाले लाभ की बदौलत देश के सबसे बड़ी निजी जीवन बीमा कंपनी एसबीआई लाइफ ने अप्रैल-सितंबर 2009 की तिमाही में 114 करोड़ रुपये का शुध्द लाभ दर्ज किया जबकि पिछले साल की समान अवधि में कंपनी को 46 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। अप्रैल से सितंबर 2008 की तिमाही में निवेश से होने वाला आकलित लाभ 75 करोड़ रुपये का था जबकि घाटा 130 करोड रुपये का हुआ था।

एसबीआई लाइफ के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी एम एन राव ने कहा, 'परिचालन की लागत कम होने और कुछ हद तक निवेश से होने वाले लाभों की वजह से हम लाभ दर्ज करने में सफल रहे हैं। कुल मिलाकर हम चाहेंगे कि कारोबार में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो। हम खर्च अनुपात को नियंत्रित करने में सफल रहे हैं। पिछले साल यह 16 प्रतिशत था और वर्तमान में 15.73 प्रतिशत है।'

चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीने में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ ने पहले प्रीमियम से होने वाली आय में 38 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की और यह 2,128 करोड़ रुपये रहा। रिलायंस लाइफ ,जो सार्वजनिक निर्गम लाने की तैयारी कर रहा है, ने भी अपना घाटा कम किया है।

अप्रैल-सितंबर 2008 की अवधि में जहां घाटा 517.9 करोड रुपये का था वह चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में घट कर 111.7 करोड़ रुपये रह गया है। खर्च के बेहतर प्रबंधन से बजाज आलियांज का शुध्द लाभ 125 करोड रुपये रहा जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में कंपनी ने 24 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया था। पहली छमाही के दौरान कंपनी के कारोबार में 29 प्रतिशत की गिरावट आई।

बजाज आलियांज लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य वित्तीय अधिकारी राजेश विश्वनाथन ने कहा, 'हमारे खर्च का अनुपात 20.5 प्रतिशत से घट कर 18.6 प्रतिशत पर आ गया है। पहली छमाही में नया कारोबार कम होने से हमें मदद मिली है।'

रिन्यूअल प्रीमियम बढ़ने से बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस का घाटा भी कम हुआ है। अप्रैल-सितंबर 2009 में जहां यह 347 करोड़ रुपये था वहीं चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में यह 238 करोड़ रुपये रहा।

बिड़ला सन लाइफ के मुख्य वित्तीय अधिकारी मयंक बथवालने कहा, 'घाटा हमारे द्वारा किए गए उपायों के अनुकूल रहा है। रिन्यूअल प्रीमियम, उत्पादकता बढ़ाने और खर्च पर प्रबंधन पर हमने ध्यान बढ़ाया है।' पहली छमाही में इस बीमा कंपनी का रिन्यूअल प्रीमियम 53 प्रतिशत के हिसाब से बढ़ा है।

  
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