| सेबी का शिकंजा होगा सख्त | | पावर ऑफ अटॉर्नी के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए उठाएगा कदम | | | बीएस संवाददाता / मुंबई November 03, 2009 | | | | |
पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) पावर ऑफ अटॉर्नी के गलत इस्तेमाल की वजह से निवेशकों को होने वाले नुकसान की आशंका को खत्म करने की कोशिश कर रहा है।
इस लिहाज से शेयर दलालों की जगह पर ग्राहकों की पावर ऑफ अटॉर्नी के इस्तेमाल के बारे में नए प्रावधान बनाने की तैयारी की जा रही है। बाजार नियामक ने इस मसले पर जनता की प्रतिक्रिया लेने के लिए एक परामर्श पत्र भी आज शाम जारी किया।
सेबी का कहना है कि वह इस बात पर रोक लगाना चाहता है कि शेयर दलाल की जगह पर उसका कोई प्रतिनिधि या फिर फ्रैंचाइजी ग्राहक की पावर ऑफ अटॉर्नी का इस्तेमाल करे। सेबी का स्पष्ट रूप से कहना है कि ब्रोकरेज के जरिये ही ग्राहक की पावर ऑफ अटॉर्नी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए और उसके किसी सहयोगी ब्रोकर या फिर कर्मचारी को ग्राहक की पावर ऑफ अटॉर्नी के इस्तेमाल से रोकना होगा।
इसके साथ ही सेबी का यह भी कहना है कि ब्रोकर या फिर लेन-देन कराने वाले को या तो असली पावर ऑफ अटॉर्नी ग्राहक को भेजनी चाहिए या फिर उसकी प्रमाणित प्रति ग्राहक को सौंपनी चाहिए। साथ इन्हें शेयरों और पैसों के लेन-देन की जानकारी भी एसएमएस के जरिये ग्राहकों को देनी चाहिए। सेबी यह भी चाहता है कि इस दस्तावेज में इसके साथ जुड़े निपटारों और विवादों के लिए भी प्रावधान हों।
कुछ पावर ऑफ अटॉर्नी प्रतिबंधित पावर ऑफ अटॉर्नी की श्रेणी में आते हैं लेकिन बाजार सूत्रों के मुताबिक शेयर दलाल ग्राहकों को सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी देने के लिए दबाव डालते हैं। दरअसल, सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी की आड़ में शेयर दलाल को कई अधिकार मिल जाते हैं। इसके जरिये वह खुले बाजार में शेयरों को बेच भी सकता है और शेयरों की बिक्री से हुए मुनाफे को ट्रेडिंग खाते में भेज भी सकता है।
प्रस्तावित मसौदे में ब्रोकरेज फर्म या फिर लेन-देन में शामिल पक्ष किसी भी तरह से अपने मौजूदा साझेदार से अलग होने या फिर किसी अन्य के साथ विलय करने की स्थिति में पावर ऑफ अटॉर्नी के इस्तेमाल का अलग प्रावधान है। इस स्थिति में संबंधित पक्ष को अपने ग्राहक से उसकी पावर ऑफ अटॉर्नी के आगे इस्तेमाल के लिए लिखित अनुमति लेनी होगी।
सूत्रों के मुताबिक सेबी को इस बारे में काफी शिकायतें मिल रही थीं कि ग्राहकों की अनुमति के बिना कई फ्रैचाइजी और सहयोगी ब्रोकरेज फर्म उनकी पावर ऑफ अटॉर्नी का बिना उनकी जानकारी के इस्तेमाल कर रहे हैं।
एक फर्म के अधिकारी का कहना है,'ग्राहक को तभी इसका पता चलता है जब उसे नुकसान उठाना पड़ता है।' वहीं फ्रैचाइजी और सहयोगी ब्रोकरेज फर्मों की कमाई सौदों की संख्या से तय होती है। अपने सौदों की तादाद बढ़ाने के लिए कई बार वे यह रास्ता अख्तियार करते हैं।
पावर ऑफ अटॉर्नी के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए पेश किया परामर्श पत्र
गलत तरीके से निवेशकों के नुकसान की आशंका होगी दूर
शेयर ब्रोकर की जगह पर उसका कोई प्रतिनिधि या फिर फ्रैंचाइजी, ग्राहक की पावर ऑफ अटॉर्नी का न करे इस्तेमाल
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