| देसी स्कूलों को मिलेगा अंकल सैम का साथ | | अरुण यादव / मुंबई November 03, 2009 | | | | |
देश में स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में जल्द ही नई बयार बहने वाली है।
अमेरिका के वर्जीनिया राज्य का एक प्रतिनिधिमंडल इन दिनों भारत दौरे पर है और वह भारतीय स्कूलों में अमेरिका के लिए संभावनाएं तलाश रहा है। इसके लिए वह भारतीय स्कूलों के साथ गठजोड़ करने पर भी विचार कर रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि भारत के शिक्षण संस्थाओं की ओर से इस पहल का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया जा रहा है। ऐसे में साफ जाहिर है कि जल्द ही उच्च शिक्षा की तरह बुनियादी शिक्षा के लिए भी भारतीय छात्रों को विदेशी शिक्षकों से शिक्षा के गुर सीखने को मिल सकते हैं। साथ ही भारतीय स्कूलों में अमेरिकी छात्र और भारतीय छात्रों को एक साथ बैठकर पढ़ाई करते हुए भी देखा जा सकेगा।
वैसे तो भारत में कई विदेशी शिक्षण संस्थाएं अपने-अपने स्कूल चला रही हैं। हालांकि, इन स्कूलों में आम लोगों के लिए अपने बच्चों को पढ़ाना काफी महंगा पड़ता है। वहीं वर्जीनिया के प्रतिनिधिमंडल ने भारत में मौजूद स्कूलों के साथ ही गठजोड़ कर उनके साथ आगे बढ़ने का मन बनाया है। इसके अलावा इस पहल के जरिये देश के ग्रामीण इलाकों पर भी खासा जोर देने की बात की जा रही है।
इंडो-अमेरिकन सोसायटी ने इस मुहिम को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका अदा की है। इंडो-अमेरिकन सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. वी. रंगराज ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि इतिहास इस बात का गवाह है कि भारतीय छात्र स्नातक तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए भारी तादाद में विदेश जाते हैं।
हालांकि, भारत में ऐसे शिक्षण संस्थान मौजूद हैं जिनमें बेहतर शिक्षा दी जा रही है और इन स्कूलों में पढ़े लोगों ने दुनिया भर में काफी नाम कमाया है लेकिन विदेशी शिक्षण संस्थाओं का खुमार जेहन में छाए रहने की वजह से भारत की बेहतरीन प्रतिभाएं पढ़ाई के लिए विदेश जाने को तरजीह देती हैं।
ऐसे में इस मुहिम के तहत इन प्रतिभाओं को रोकने के साथ-साथ उन्हें बेहतर शिक्षा की तालीम देने में मदद मिलेगी। साथ ही बुनियादी स्तर पर ही विदेशी शिक्षण संस्थाओं की तर्ज पर शिक्षा की तालीम मिलने से ऐसे छात्रों की करियर की नींव भी मजबूत हो सकेगी।
डॉ. रंगराज का कहना है कि प्रतिनिधिमंडल के दौरे के बाद अमेरिका के अन्य प्रांतों के शिक्षण संस्थाओं को भी भारत आने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। मुंबई के कई नामचीन स्कूलों ने अपने संकुलों में इस प्रतिनिधिमंडल को बात आगे बढ़ाने के लिए हामी भर दी है, जिसमें बॉम्बे स्कॉटिश, वी. एन. सूले, एन. डालमिया एवं न्यू एरा जैसे स्कूलों का नाम शामिल है।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और वर्जीनिया के एक स्कूल अधीक्षक एलन सीबर्ट ने बताया कि भारतीय स्कूलों के साथ हमारी बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है और हमें उम्मीद है कि संभवत: अगले शिक्षण सत्र के साथ ही यह मुहिम रंग ला सकती है।
एलन सीबर्ट के सुर में सुर मिलाते हुए न्यू एरा स्कूल का संचालन करने वाली कॉर्पोरेट दिग्गज आदित्य बिड़ला के निदेशक (एचआर) सुबंतो मिश्रा ने भी माना है कि किफायती शिक्षा प्रदान किए बिना यह मुहिम रंग नहीं ला सकती है।
अनूठी पहल
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारतीय स्कूलों के साथ गठजोड़ करने की तलाश रहा है संभावनाएं
बुनियादी शिक्षा में भी विदेशी शिक्षक सिखा सकेंगे गुर
ग्रामीण इलाकों पर होगा खासा जोर
मुंबई के कई नामचीन स्कूल योजना पर सहमत
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