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अक्टूबर में सीमेंट कारोबार सुस्त
बीएस संवाददाता / मुंबई November 03, 2009

बड़ी सीमेंट कंपनियों के शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि कंपनियां सितंबर में हुए खराब प्रदर्शन को अक्टूबर में भी दोहरा सकती हैं। कंपनियों ने चालू वित्त वर्ष के दौरान न्यूनतम विकास दर दर्ज की है।

एसीसी, अंबुजा सीमेंट, ग्रासिम और अल्ट्राटेक मिलकर देश के कुल सीमेंट उत्पादन का एक तिहाई से ज्यादा उत्पादन करती हैं। भारत में इस समय कुल सीमेंट उत्पादन 2300 लाख टन है। चालू वित्त वर्ष में सीमेंट की उत्पादन क्षमता में विस्तार के बाद बिड़ला की फर्मों ने मासिक आधार पर पिछले साल की तुलना में कम विकास दर दर्ज की है।

अंबुजा और एसीसी ने हाल की तिमाहियों के दौरान क्षमता विस्तार नहीं किया है, जिनके उत्पादन और लदान में कमी आई है। उदाहरण के लिए देश की सबसे बड़ी सीमेंट निर्माता कंपनी एसीसी ने अक्टूबर महीने में 0.59 प्रतिशत कम बिक्री की।

अक्टूबर-09 में कंपनी की कुल बिक्री 16.9 लाख टन रही, जबकि अक्टूबर-08 में कंपनी ने कुल 17.0 लाख टन सीमेंट की बिक्री की थी। कंपनी का उत्पादन भी पिछले साल के समान महीने के 17.4 लाख टन की तुलना में इस साल अक्टूबर में गिरकर 17.1-17.2 लाख टन रह गया है।

एसीसी की सहायक  कंपनी और स्विस सीमेंट कंपनी होलीसिम की सहयोगी अंबुजा सीमेंट ने अक्टूबर महीने के लौहान लदान में 3.03 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की है। पिछले साल अक्टूबर के 14.2 लाख टन की तुलना में अक्टूबर-09 के दौरान कंपनी ने 14.6 लाख टन सीमेंट की लदान की है। इसका उत्पादन भी 3.24 प्रतिशत बढ़कर 15 लाख टन हो गया है।

देश के सबसे बड़े सीमेंट उत्पादक समूह, आदित्य बिड़ला समूह की कंपनियों ग्रासिम और अल्ट्राटेक ने दो अंकों की विकास दर हासिल करने में सफलता पाई है। कंपनी ने अक्टूबर महीने में 28.2 लाख टन सीमेंट बेचा है और उसके विकास दर में 11.13 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि कंपनी की लदान दर में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 4.5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है।

उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि अक्टूबर में त्योहारी मौसम के चलते कारोबार प्रभावित हुआ है और मांग घटी है। सीमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन इस सिलसिले में संपूर्ण आंकडे अगले सप्ताह जारी करेगा।

अप्रैल से सीमेंट क्षेत्र ने लगातार दो अंकों की विकास दर हासिल की। उसके बाद सितंबर महीने में उद्योग की वृध्दि दर कम होकर 6 प्रतिशत के नीचे आ गई। इसकी प्रमुख वजह देश भर में देर से हुई मॉनसूनी बारिश को माना गया था।

  
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