| निजी कंपनियों ने भी घटाए स्टील के दाम | | बीएस संवाददाता / कोलकाता November 03, 2009 | | | | |
स्टील अथॉरिटी आफ इंडिया (सेल) द्वारा स्टील की कीमतें घटाए जाने के एक दिन बाद निजी क्षेत्र की कंपनियों ने भी कीमतों में कमी करने का फैसला किया है।
मंगलवार को कीमतें कम करने वाली कंपनियों की सूची में जेएसडब्ल्यू स्टील, एस्सार स्टील और इस्पात इंडस्ट्रीज भी शामिल हो गई हैं। इन कंपनियों ने कीमतों में 700-1500 रुपये प्रति टन की कटौती की घोषणा की है। इस्पात ने कीमतों में 1000 रुपये प्रति टन, एस्सार स्टील ने कीमतों में 700-1000 रुपये प्रति टन की कटौती की है।
सेल के बाद प्रमुख स्टील उत्पादक कंपनी जेएसडब्ल्यू स्टील ने अपने उत्पादों की कीमतों में1,400 रुपये प्रति टन तक की कटौती की है। कंपनियों के इस फैसले से शेयर बाजार में इनके खरीदार निराश हो गए। स्थिति यह हुई कि जेएसडब्ल्यू स्टील के शेयरों में 10.50 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 676.20 रुपये पर पहुंच गए।
वहीं इस्पात इंडस्ट्रीज के शेयर 4.24 प्रतिशत गिरकर 18.05 रुपये पर पहुंच गए। जेएसडब्ल्यू स्टील के संयुक्त प्रबंध निदेशक शेषगिरी राव ने कहा, 'पिछले दो माह के दौरान इस्पात की कीमतों में 50 से 60 डॉलर प्रति टन की कमी आई है। इसके अलावा सितंबर की तुलना में रुपया भी मजबूत हुआ है। इन दोनों वजहों से हमने कीमतों में कटौती की है।'
कंपनी ने अपने फ्लैट उत्पादों की कीमतों में कटौती की है। इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से वाहन उद्योग में होता है। हालांकि, निर्माण और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले लॉन्ग स्टील उत्पादों की कीमतों में बदलाव नहीं किया गया है। राव ने कहा, 'लॉन्ग उत्पादों के दाम जुलाई से दबाव में हैं। वे पहले ही काफी नीचे हैं।'
उन्होंने कहा कि रुपये की मजबूती और वैश्विक कीमतों में गिरावट की वजह से दामों में कमी की गई है। इसके साथ ही चीन के घरेलू बाजार में भी स्टील की कीमतों में कमी आई है। जेएसडब्ल्यू स्टील ने फ्लैट उत्पादों की कीमतों में 3-5 प्रतिशत तक की कटौती की है। इसका उपयोग उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में होता है। टाटा स्टील ने अभी कीमतों पर कोई फैसला नहीं किया है। कीमतें घटाने के पीछे बढ़ता आयात भी एक प्रमुख वजह है।
उद्योग जगत के सूत्रों का कहना है, 'फ्रांस जैसे गैर परंपरागत बाजारों से भी हॉट रोल्ड क्वॉयल रका आयात भारत में अप्रैल-अगस्त के दौरान हुआ, जिसकी औसत कीमत 456 डॉलर प्रति टन पड़ी। वहीं खाड़ी देशों और सुदूर पूर्व के देशों में कीमतें घटकर 405-420 डॉलर प्रति टन रह गई हैं।' कीमतें कम किए जाने के पहले भारत में एचआरसी की कीमतें 32,000 रुपये प्रति टन पर थीं।
|