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हीरे की खोज में अफ्रीका पहुंची श्रीनुज
बीएस संवाददाता / मुंबई November 03, 2009

बड़ी खनन कंपनियों, डी बीयर्स और रियो टिंटो द्वारा उत्पादन में कटौती के चलते कच्चे हीरे की उपलब्धता में गिरावट आई है।

ऐसे में मुंबई की कंपनी श्रीनुज ऐंड कंपनी ने दक्षिण अफ्रीका में कार्यालय खोला है, जिससे पूरे दक्षिणी अफ्रीका से उच्च गुणवत्ता के हीरों की खरीदारी की जा सके। श्रीनुज ने अगस्त महीने में बोत्सवाना में विनिर्माण इकाई की स्थापना की थी।

लेकिन 14 देशों में काम करने वाली कंपनी कच्चे हीरे की अपनी खपत जरूरतों को दक्षिण अफ्रीका से पूरा करना चाहती है। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है कि कच्चे हीरे की खनन कंपनियां रियो टिंटो और डी-बीयर्स की हिस्सेदारी विश्व के कुल उत्पादन में 70 प्रतिशत है और इन कंपनियों ने उत्पादन में 50 प्रतिशत की कटौती करने का फैसला किया है।

खदान के लिहाज से धनी और कम विकसित देश- जैसे बोत्सवाना, जांबिया आदि ने खदान गतिविधियों में निवेश करना शुरू कर दिया है। वे स्थानीय सहयोगियों के साथ मिलकर कारोबार कर रहे हैं। कच्चे हीरे की खरीद के बाद भारतीय हीरा कारोबारी, वहीं पर उसकी तराशी शुरू कर सकते हैं।

भारत में कच्चे हीरे की खपत कुल वैश्विक खपत का करीब 7 प्रतिशत, कटे हीरे का 90 प्रतिशत और दुनिया में कुल हीरे का 70 प्रतिशत से ज्यादा हीरे की तराशी होती है। एक अनुमान के मुताबिक अगले 2-3 साल में भारत में कच्चे हीरे की खपत बढ़कर 11 प्रतिशत हो सकती है, वहीं अमेरिका में खपत 40 प्रतिशत से गिरकर 35 प्रतिशत हो सकती है।

चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के दौरान कंपनी के मुनाफे में 120 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी का शुध्द मुनाफा 12.97 करोड़ रुपये रहा है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में मुनाफा 5.9 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी की कुल बिक्री में 16 प्रतिशत का इजाफा हुआ है और पिछले साल के 342.16 करोड़ रुपये की तुलना में यह बढ़कर 396.86 करोड़ रुपये हो गई है।

  
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