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खेतों में फिर लहलहाएगा काला सोना
सिध्दार्थ कलहंस / लखनऊ November 03, 2009

दुनिया भर में मशहूर उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में चार सालों के बाद एक बार फिर खेतों में काला सोना लहलहाएगा। वजह यह है कि पहले सूखे की मार और फिर गन्ने का वाजिब दाम मिलता न देख किसान अफीम की खेती की ओर मुड़ने लगे हैं।

उपज की कमी, लागत न निकलने और नारकोटिक्स विभाग के शिकंजे के चलते अफीम की खेती से मुंह मोड़ चुके बाराबंकी के किसान अब फिर से इसकी खेती की ओर मुड़ने लगे हैं। इस साल नारकोटिक्स विभाग के पास 2000 से ज्यादा किसानों ने अफीम की खेती के लाइसेंस के लिए आवेदन किया है।

नारकोटिक्स विभाग ने इनमें से 1,200 काश्तकारों को अफीम की खेती के लिए लाइसेंस जारी भी कर दिया है। इस साल बाराबंकी में करीब 300 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर अफीम की खेती की जाएगी। अपनी गुणवत्ता के चलते देश विदेश में बाराबंकी की अफीम अपना लोहा मनवा चुकी है।

बाराबंकी में अफीम की खेती के प्रति किसानों की दीवानगी का आलम यहां तक हो गया था कि 2003-2004 में यहां 22,000 किसानों ने करीब 1,500 हेक्टेयर में पौध लगायी थी। जिले में अच्छी क्वालिटी की अफीम की पैदावार ने इसे तस्करों का स्वर्ग बना दिया था।

नारकोटिक्स विभाग ने देश-विदेश में हेरोइन की तस्करी करने वाले कई गिरोहों को बाराबंकी जिले के जैतपुर, हैदरगढ़ और सुबेंहा इलाके से पकड़ा और किसानों से भी उपज का ब्योरा कड़ाई से लेना शुरू कर दिया।

उपज घटने, लागत बढ़ने और नारकोटिक्स विभाग के कड़े रुख के चलते किसानों का अफीम से मोहभंग होने लगा। हालात यहां तक हो गए कि 2006-07 में केवल 7 किसानों नें अफीम की खेती का लाइसेंस लिया। लाइसेंस लेने वाले किसानों नें भी अफीम से तौबा कर ली और लाइसेंस को नारकोटिक्स विभाग को सरेंडर कर दिया।

इस साल गन्ने में घाटा और खरीफ की फसल के सूखे की भेंट चढ़ जाने के बाद एक बार फिर से किसानों की रुचि अफीम में जागी और बड़ी तादाद में लाइसेंस के लिए आवेदन किए गए। जिले में कभी अफीम की अच्छी पैदावार करने वाले किसान दयाराम वर्मा के मुताबिक इस साल मौसम में पहले से ठंड है और देर की बारिश के चलते खेतों में नमी बरकरार है जोकि अफीम की खेती के लिए बढ़िया है।

उनका कहना है कि बाराबंकी में सबसे अच्छी क्वालिटी जिसे अव्वल कहते हैं, कि खासी पैदावार होती है जबकि दूसरे नंबर की पंजुम अफीम भी ठीक-ठाक होती है। उनके मुताबिक बाराबंकी में थर्ड रेट की अफीम जिसे चहरुम कहते हैं न के बराबर होती है।

  
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