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आईसीआईसीआई बैंक : कोई हलचल नहीं
दिशासूचक
शोभना सुब्रमण्यन /  November 03, 2009

हाल में आईसीआईसीआई बैंक के बारे में जो नकारात्मक चर्चाएं हुई उसकी वजह से कारोबार थोड़ा मंदा है। बैंक का जोर फिलहाल कम लागत वाली जमाओं पर है।

सितंबर 2009 की तिमाही में आईसीआईसीआई बैंक की कमाई में महज 2.6 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई और कर्ज में सालाना 14 फीसदी की कमी आई जिससे खुदरा कर्ज में भी तेजी से गिरावट हुई। शुद्ध ब्याज आय में सालाना 5 फीसदी की गिरावट के बावजूद शुद्ध ब्याज मार्जिन 2.5 फीसदी के साथ स्थिर था।

साल दर साल परिचालन मुनाफे में 6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और परिणामत: कम परिचालन लागत की वजह से यह 18 फीसदी तक हो गया। यह एक हकीकत है कि बैंक पर समेकन के चरण में जाने के लिए काफी दबाव रहा। उसके बाद एक दौर आया जब इस बैंक से काफी आक्रामक तरीके से उधारी ली गई और इससे बैंक पर उधार से जुड़े कई जोखिम भी जुड़ गए।

अब यह बैंक जोखिम से जुड़े मसले को खत्म करने की प्रक्रिया में लगा हुआ है। परिसंपत्तियों की गुणवत्ता असमान है हालांकि उसके गैर निष्पादित कर्जों में सुधार हो सकता है जो सितंबर की तिमाही में लगभग 1,100 करोड़ रुपये रहा और जून की तिमाही में 1,400 करोड़ रुपये था। लगभग 70 फीसदी सकल गैर-निष्पादित कर्जों (एनपीएलएस) का संबंध खुदरा परिसंपत्तियों से है।

ज्यादा हिस्सेदारी वाले खुदरा शुद्ध एनपीएलएस का संबंध असुरक्षित उत्पादों से होता है। कर्ज के रकम की पुर्नंसंरचना 5,000 करोड़ रुपये तक की जानी है जो अब कर्ज का 2.5 फीसदी है। यह संभव है कि ज्यादा कर्ज की पुर्नसंरचना करने की जरूरत पड़े और विश्लेषकों का ऐसा अनुमान है कि वे कर्ज को 3-3.5 फीसदी तक बढ़ा सकते हैं।

इसके अलावा 51 फीसदी का कवरेज अनुपात भी बेहतर है और यह प्रावधान बढ़ाया भी जा सकता है क्योंकि केंद्रीय बैंक ने भी नियमों के प्रावधावन को थोड़ा और कड़ा किया। लोन बुकिंग को बढ़ाने के लिए बैंक के पास पर्याप्त पूंजी भी है। इसके अलावा यह ब्रांच के नेटवर्क के विस्तार की योजना बना रही है।

विस्तार की इस योजना के तहत यह बैंक अगले साल तक 400 अतिरिक्त शाखाओं को जोड़ देगा। इससे बैंक की आय में इजाफा होगा और बचत खाता भी जुड़ेंगे। बैंक अब ज्यादा लागत वाली जमाओं को कम कर रहा है ताकि देनदारियों की लागत में कमी आए। इस रणनीति से सस्ते चालू और बचत खातों (सीएएसए) की हिस्सेदारी सितंबर की तिमाही में 37 फीसदी हो गई जो जून की तिमाही में 33 फीसदी थी।

ज्यादा सीएएसए के लिहाज से नतीजे बेहद आश्चर्यजनक है और मार्जिन स्थिर है। आईसीआईसीआई के शेयर में थोड़ी गतिविधि दिख सकती है। हालांकि फिलहाल ज्यादा बदलाव की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय परिसंपत्ति के क्षेत्र में कुछ मुश्किले हैं क्योंकि वे ज्यादा मुनाफादायक नहीं हैं। आईसीआईसीआई को यह बताने की जरूरत है कि यह बिना एनपीएलएस बनाए हुए भी ज्यादा उधारी दे सकता है।

एम ऐंड एम : कारोबार में दिखी मजबूती

ज्यादा कारोबार और कच्चे माल के कम बिल की वजह से इस कंपनी के मुनाफे में बढ़ोतरी हुई। महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (एमऐंडएम) को यह उम्मीद थी कि सितंबर की तिमाही में मुनाफा हो सकता है।

कंपनी के कारोबार में बढ़ोतरी हो रही है मसलन यूटिलिटी व्हीकल के कारोबार में 44 फीसदी का इजाफा हुआ और टै्रक्टर के कारोबार में भी बढ़ोतरी हो रही है। इसके राजस्व में 35 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई और यह 4,465 करोड़ रुपये हो गया। इसकी वजह यह थी कि कंपनी को इस साल के पहले त्योहारी मौसम का फायदा मिला।

सालाना आधार पर परिचालन मार्जिन (ओपीएम) में बढ़ोतरी को भी शामिल किया गया है क्योंकि कच्चे माल की कीमतों में भी तेजी से कमी आई है और ओपीएम 18.24 फीसदी है जो उम्मीद से कहीं ज्यादा है। तिमाही के दौरान बिक्री के लिए कच्चे माल की हिस्सेदारी में भी 6.3 फीसदी की कमी आई।

वैसे निश्चित तौर पर पीटीएल के विलय का लाभ मिलने वाला है। कंपनी उत्पादन लागत की वजह से एक खास रकम की बचत करने में सक्षम है। इसकी वजह यह है कि कंपनी का परिचालन बड़े पैमाने पर हो रहा है। यूटिलिटी व्हीकल के क्षेत्र में एमऐंडएम की हिस्सेदारी 65 फीसदी है। उम्मीद के विपरीत जाइलो सबसे ज्यादा बिकने वाला मॉडल था। ऑटोमोटिव सेक्टर का नजरिया बेहतर है।

ग्रामीण क्षेत्र की आय मजबूत है और शहरी क्षेत्र के बाजार का प्रदर्शन भी बेहतर है।  वैसे स्टील के टुकड़े और टायर जैसे कच्चे माल की कीमतों के तेजी आने से दिक्कते हो सकती हैं। हालांकि कारोबार पर पड़ने वाले असर का भार कंपनी कीमतों में बढ़ोतरी के जरिये उपभोक्ताओं पर डालेगी इसकी संभावना कम ही है। 

जहां तक कृषि उपकरणों की बात है उसमें 40 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों की आय कृषि पर निर्भर नहीं है। इसके अलावा सरकार देश के ग्रामीण क्षेत्रों पर ज्यादा जोर दे रही है ऐसे में संभव है कि ग्रामीण उपभोक्ताओं के पास पैसे होंगे। सेंसेंक्स के 62 फीसदी की तुलना में एमऐंडएम के शेयर में 228 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई।

हालांकि मानसून के कमजोर होने की वजह से बिक्री पर असर पड़ने की संभावना के मद्देनजर, इसके प्रदर्शन पर असर पड़ा। विश्लेषकों का ऐसा अनुमान है कि स्टॉक के लिए कुछ मूल्यांकन लगभग 1,000 रुपये है और फिलहाल यह असंभव है कि इसमें इजाफा होगा।

  
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