| सरकारी साधारण बीमा कंपनियों का चल रहा है पुनर्गठन | | शिल्पी सिन्हा / मुंबई November 03, 2009 | | | | |
सार्वजनिक क्षेत्र की चार साधारण बीमा कंपनियां जोखिमों की अंडरराइटिंग से होने वाले घाटे को सुधारने की दिशा में काम कर रही हैं।
शुरुआत में ये चार खिलाड़ी, जिनमें न्यू इंडिया एश्योरेंस, नैशनल इंश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया और ओरियंटल शामिल हैं, अपने अंदरुनी मुद्दों से निपटने जा रही हैं। इसलिए बीमा कंपनियां दावों की उन सूची का समाधान कर रही हैं जिनका भुगतान किया जा चुका है लेकिन जो बुक में प्रदर्शित नहीं हो रहा है।
वित्त मंत्रालय द्वारा शुरू की गई पुनर्निर्माण की इस प्रक्रिया से जुड़े एक सूत्र ने बताया, 'ऐसे कई मामले है जहां बीमा कंपनी ने दावों का भुगतान तो किया है लेकिन प्रवाधान की बात करें, जो कुछ मामलों में यह भुगतान की राशि से कहीं अधिक है, तो वे अभी भी बुक तक ही सीमित हैं।'
इसके अतिरिक्त कारोबारी प्रक्रिया की री-इंजीनियरिंग (बीपीआर), जिसमें कोर इंश्योरेंस सॉल्यूशन और केंद्रीकृत दावा निपटान शामिल हैं, को भी अपनाया जा रहा है। विभिन्न श्रेणियों - बैंकएश्योरेंस, बड़ी कंपनियां और एजेंसी-पर ध्यान देने वाले निकायों के तौर पर कारोबार का पुनर्गठन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त कर्मचारियों को प्रदर्शन से जुड़े भत्ते दिए जाएंगे।
शुरुआत में कंपनियों ने नियमित आधार पर कर्मचारियों के प्रदर्शन को मापना शुरू किया है जिसका आधार अर्जित किया गया कारोबार, अंडरराइट किए गए जोखिमों पर किया गया भुगतान और दावों का निपटान है।
एक सूत्र ने कहा, 'इससे पहले प्रदर्शन को वार्षिक लेखा को अंतिम रूप दिए जाने के बाद मापा जाता था जो आम तौर पर जुलाई-अगस्त के महीनों में किया जाता था। लेकिन अब, कंपनियां प्रदर्शन को मासिक आधार पर मापने का प्रयास कर रही हैं ताकि मध्यावधि में इसमें सुधार लाया जा सके।'
वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि चार साधारण बीमा कंपनियों द्वारा अठाया गया यह कदम 90 की दशक के मध्य और उत्तरार्ध्द में बैंकों द्वारा किए गए उपायों जैसे ही हैं, लेकिन तब सरकार को पूंजी नहीं देनी पड़ी थी।
हाल ही में वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनियों से कहा था कि वे कोर इंश्योरेंस सॉल्यूशन (सीआईएस) को अमली जामा पहनाएं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा कोर बैंकिंग सॉल्यूशन अपनाए जाने से ग्राहकों को देश में कहीं से भी लेन-देन करने में मदद मिली है।
सार्वजनिक क्षेत्र की चार साधारण बीमा कंपनियों में सबसे छोटी कंपनी ओरियंटल इंश्योरेंस पहले ही सीआईएस अपना चुका है। एक सूत्र ने बताया कि शेष तीन कंपनियां 12 से 18 महीनों में इसे अपना लेंगी। न्यू इंडिया, ओरियंटल और यूनाइटेड इंडिया ने पुनर्गठन के लिए बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप को नियुक्त किया था जबकि नैशनल इंश्योरेंस ने प्राइसवाटरहाउसकूपर्स को नियुक्त किया है।
अनुमान है कि पुनर्गठन की यह प्रक्रिया सितंबर 2010 तक संपन्न हो जाएगी। यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक जी श्रीनिवासन ने कहा, 'तकनीक का अपना महत्व है और 2010 तक अनुमान है कि हम सीआईएस का काम 100 प्रतिशत पूरा हो जाएगा। पदर्शन से जुड़े भत्तों को जोड़ कर हम बेहतर अंडरराइटिंग प्रक्रिया अपनाने पर ध्यान दे रहे हैं।'
यूनाइटेड इंडिया ने नीतिगत कारोबारी इकाइयों को बैंकएश्योरेंस, मोटर डीलर कार्यालयों, बड़े कॉर्पोरेट और एजेंसी कार्यालयों में बांटा है जबकि ओरियंटल ने बाजार को श्रेणियों के आधार पर चार समूहों में बांटा है जिनमें एजेंसी, कॉर्पोरेट, ब्रोकर्स और बैंकएश्योरेंस शामिल हैं।
दावों की सेवा उपलब्ध कराने के लिए यूनाइटेड इंडिया एक तरफ जहां निपटान कार्यालयों को मजबूत कर रही है वहीं थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (टीपीए) द्वारा दावों के निपटान में तेजी ला रही है। दूसरी तरफ ओरियंटल उन टीपीए को ज्यादा काम दे रही जिन्होंने अच्छा कारोबार किया है।
श्री निवासन ने कहा, 'री-इंजीनियरिंग की प्रक्रिया के तहत हमने शाखाओं के लिए प्रदर्शन से जुड़े भत्तों की शुरुआत की है जो निपटाए गए दावों की संख्या और समूह द्वारा उठाए गए निपटानों की संख्या पर आधारित होगा। जिन शाखाओं का संयुक्त अनुपात कम होगा उन्हें पुरस्कार दिया जाएगा।' किसी बीमा कंपनी के अंडरराइटिंग का प्रदर्शन संयुक्त अनुपात के रूप में मापा जाता है।
100 प्रतिशत से कम का संयुक्त अनुपात जोखिम की राशि पर अंडरराइटिंग से प्राप्त होने वाले बेहतर रिटर्न को प्रदर्शित करता है जबकि 100 प्रतिशत से अधिक का संयुक्त अनुपात अंडरराइटिंग घाटे को प्रदर्शित करता है। इसकी गणना घाटा अनुपात और खर्च अनुपात को जोड़ कर की जाती है।
घाटा अनुपात हानि की राशि में अर्जित प्रीमियम से भाग देकर प्राप्त किया जाता है। खर्च अनुपात परिचालन खर्च में अर्जित प्रीमियम से भाग देकर निकाला जाता है। साधारण बीमा कंपनियों का खर्च अनुपात लगभग 20 प्रतिशत है।
ओरियंटल इंश्योरेंस के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक एम रामदॉस ने कहा, 'हमारी बाजार हिस्सेदारी घट रही है इसलिए हमले कंसल्टेंट नियुक्त किया है। मंत्रालय ने अन्य तीन बीमा कंपनियों से कहा है कि वे सीआईएस अपनाएं। सीआईएस हम साल 2005 में ही अपना चुके हैं। हम अनुमान करते हैं कि संयुक्त अनुपात 10 प्रतिशत तक ले आएंगे जो वर्तमान में 135 प्रतिशत है।'
नैशनल इंडिया इंश्योरेंस के महा प्रबंधक आर के कौल ने कहा, 'हम आईटी आधारित बीपीआर कर रहे हैंञ मार्च 2010 तक हम सीआईएस लॉन्च करेंगे जिसकी लागत तकरीबन 200 करोड रुपये होगी और यह चारों बीमाकर्ताओं की तुलना में सबसे महंगा है।'
पुनर्गठन की प्रक्रिया
साधारण बीमा कंपनियां अपना रही हैं कोर इंश्योरेंस सॉल्यूशन
कारोबारी श्रेणियों पर अधिक ध्यान देने के लिए नीतिगत व्यावसायिक इकाइयों का हो रहा है गठन
प्रदर्शन से जुड़े प्रोत्साहन के लिए अपनाई जा रही है प्रदर्शन मापक प्रणाली
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