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कहीं आपके विश्वस्त बिचौलिए ही न लगा दें चूना
तिनेश भसीन /  November 02, 2009

मुंबई के एक कारोबारी अभिजीत गोले ने हाल ही में पाया कि जो चार्टर्ड अकाउंटेंट 15 सालों से उनके लिए काम कर रहा है वह उनके जाली हस्ताक्षर के जरिए 25 लाख रुपये का चूना लगा चुका है।

हम में से अधिकांश के पास चार्टर्ड एकाउंटेंट और ब्रोकरों पर भरोसा करने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं होता। और कई बार इन वित्तीय बिचौलियों के पास पैसों के प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी होती है। परिणामस्वरूप, एक ब्रोकर बिना जानकारी दिए या राय लिए शेयरों की खरीद बिक्री कर डालते हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हाल की ट्रेंड ऐंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया (2008-09) रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है। इस रिपोर्ट में आरबीआई ने विभिन्न बैंकों द्वारा उपलब्ध कराए गए धोखाधड़ी के आंकड़ों का विश्लेषण किया है और इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि बैंकिंग क्षेत्र की अधिकांश धोखाधड़ी मध्यस्थों या थर्ड पार्टी सेवा प्रदाताओं के जरिए किया गया है।

नियामक ने तो ऐसे मध्यस्थों की एक सूची भी तैयार कर ली है जिसमें चार्टर्ड एकाउंटेंट, ट्रेवल एजेंट, रियल एस्टेट डेवलपर्स, बिल्डर, वकील और मूल्यांकन करने वाले और अन्य शामिल हैं। और ऐसी धोखाधडी क़ो रोकने के लिए बैंकिंग नियामक ने इंडियन बैंक्स एसोसिएशन को सुझाव दिया है कि वे ऐसी इकाइयों और पेशेवरों की सूची बना कर बैंकों को भेजें।

एक निजी बैंक में अनुपालन के प्रमुख ने कहा, 'खुदरा ग्राहक आसानी से मध्यस्थों जैसे चार्टर्ड एकाउंटेंट, डेवलपर और ट्रेवल एजेंटों की धोखाधड़ी के शिकार हो जाते हैं क्योंकि वे उनके साथ गोपनीय जानकारियां बांटे बिना नहीं रह सकते।'

उदाहरण के लिए, वकील जायदाद के जाली प्रमाणपत्र उपलब्ध करा सकते हैं या मूल्य निर्धारति करने वाला जायदाद का मूल्य बढ़ा चढ़ा कर आंक सकता है ताकि किसी व्यक्ति को वास्तविक मूल्य की तुलना में अधिक ऋण मिल सके।

चूंकि, उन्हें बैंक खाते, आयकर संबंधी दस्तावेजों, जायदाद के कागजात और अन्य गोपनीय चीजों की जानकारी होती है इसलिए वे इसे आसानी से अंजाम दे सकते हैं। ऐसी धोखाधड़ी से बचने के लिए निम्लिखित कदम उठाए जा सकते हैं।

चार्टर्ड अकाउंटेंट

आमतौर पर आयकर दाखिल करने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट की सेवाएं ली जाती हैं। कारोबारी और धनाढय व्यक्ति अपने वित्तीय मसलों के लिए उनकी सेवाएं लेते हैं। इसके तहत वे चार्टर्ड अकाउंटेंट को गोपनीय सूचनाएं जैसे पैन कार्ड, बैंक खाता संबंधी जानकारियां और चेक उपलब्ध कराते हैं।

जहांगीर गई एक कंज्यूमर एक्टिविस्ट जो धोखाधड़ी के ऐसे मामलों से निपटने में मदद करते हैं, ने कहा, 'ऐसे सौदों में अगर लोग थोड़ी सतर्कता बरते तो धोखाधड़ियों से बच सकते हैं।' एक आदत के तौर पर बैंक खातों और क्रेडिट कार्ड लेन देन की जांच की जानी चाहिए। कभी भी सादा चेक या फिर पूरा का पूरा चेक बुक उनके हाथों में नहीं सौंपना चाहिए।

गई ने कहा, 'कुछ ऐसे मामले भी प्रकाश में आए हैं जहां बिचौलिए जाली हस्ताक्षर के जरिए धोखाधड़ी करने में कामयाब रहे हैं।' ऐसी घटनाएं खास तौर से उन प्रवासी भारतीय के साथ अक्सर होती हैं जिन्होंने बिचौलियों को पावर ऑफ अटॉर्नी दे रखी है। एक बैंकर ने कहा, 'प्रवासी भारतीय इनसे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।'

विशेषज्ञ कहते हैं कि पावर ऑफ अटॉर्नी देते समय लोगों को सतर्कता बरतनी चाहिए। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी विवरण सीधे तौर पर उन्हें भेजे जा रहे हैं प कि उसे जिसे पावर ऑफ अटॉर्नी दी गई है। इसके अलावा जब पावर ऑफ अटॉर्नी रद्द किया जाता है तो इसकी सूचना संस्थानों को दी जानी चाहिए।

ट्रैवल एजेंट

अक्सर यात्रियों को अपने पासपोर्ट या क्रेडिट कार्ड संबंधी जानकारी ट्रेवल एजेंटों को देनी होती है। अगर, ट्रेवल एजेंट विश्वस्त नहीं है तो इस प्रकार की जानकारियां उपलब्ध कराना उनके लिए महंगा साबित हो सकता है।

एक बैंकर ने कहा, 'खास तौर से जब कोई यात्री विदेशी मुद्रा लेना चाहता है तो कुछ एजेंट उन्हें एक सादा चेक देने को कहते हैं ताकि सही विनिमय दर पता चलने के बाद उसमें राशि भरी जा सके। इसका गलत इस्तेमाल भी किया जा सकता है।'

इसके अतिरिक्त ट्रेवल एजेंटों के साथ क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारियां भी नहीं बांटी जानी चाहिए। अगर अपरिहार्य हो तो किसही जाने माने प्रतिष्ठित एजेंसी से ही इस प्रकार के लेन देन किए जाने चाहिए।

बिल्डर और रियल एस्टेट एजेंट

जब सब कुछ ठीक चल रहा होता है तो धोखाधड़ी भी चलती ही है। कई डेवलपर और ब्रोकर एक ही फ्लैट कई लोगों को बेच कर खरीदारों और बैंकों को धोखा देते हैं। एक बैंकर ने कहा, 'वे कागजात की नकल करते हैं और उस आधार पर बैंकों से ऋण लेने में कामयाब भी हो जाते हैं।' इस तरह की परिस्थिति न हो इसके लिए सतर्कता बरतना जरूरी है।

अगर आप किसी ऐसे स्रोत से जायदाद खरीदते हैं जिसे अच्दी तरह नहीं जानते तो एक वकील की व्यवस्था करें। उस जायदाद का सत्यापन करवाइए और यह सुनिश्चित कीजिए कि कहीं उस जायदाद के आधार पर कोई ऋण तो नहीं लिया गया है।

  
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