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जीएसटी : अगर-मगर की डगर पर आएगा नया कर
जीएसटी को लेकर कारोबारियों की विभिन्न एसोसिएशनों ने अपने स्तर पर कई जानकारी जुटाई हैं। उनके कुछ अंश पेश कर रहे हैं
राजीव कुमार /  November 02, 2009

क्या है जीएसटी

जीएसटी वस्तुओं व सेवाओं पर लगने वाला कर है।
यह कर हर स्तर पर वस्तुओं की बिक्री या सेवाओं की अदायगी पर लगेगा।
इसमें वस्तुओं की बिक्री या सेवा अदायगी के समय किए गए कर संग्रह में खरीद करते समय दिए गए कर का मुजरा  (इनपुट क्रेडिट) मिलता है।
यह मौजूदा वैट प्रणाली के समान है।
इसे राष्ट्रीय स्तर पर वस्तु व सेवा पर वैट कह सकते हैं।
इस कर में वस्तुओं के साथ-साथ सेवाओं पर कर भी लगता है।
सामान व सेवाओं पर एक ही दर से कर लगता है।

जीएसटी : सभी करों का समावेश

जीएसटी में वस्तुओं व सेवाओं पर लगने वाले सभी करों का समावेश है।
इस प्रणाली के लागू होने के बाद केंद्र सरकार द्वारा लगाए जाने वाला उत्पाद शुल्क, सामान की बिक्री के समय लगने वाले सीएसटी व राज्य के वैट के अलावा सेवाओं पर लगने वाले सेवा कर एवं राज्य सरकार द्वारा लगाए जाने वाले मनोरंजन कर, बिजली शुल्क जैसे करों का खात्मा हो सकता है।

भारत में इसकी जरूरत

भारतीय अर्थव्यवस्था में लगभग 55 फीसदी हिस्सा सेवा क्षेत्र का है।
सामान व सेवाओं पर अलग-अलग कर मुमकिन नहीं है।
किसी भी वस्तु के उत्पादन में सामान व सेवा दोनों की जरूरत होती है, लिहाजा इसे अलग नहीं किया जा सकता है।
सामान के उत्पादन मूल्य में भी कर का इनपुट क्रेडिट मिलने में कमी आएगी।

जीएसटी : निचोड़

भारत में केवल दो अप्रत्यक्ष कर रहेंगे यानी केंद्र व राज्य का जीएसटी। सीमा शुल्क का केंद्र के जीएसटी में समावेश होगा। साथ ही इसमें उत्पाद शुल्क, सेवा कर व शिक्षा सेस को भी शामिल किया जा सकता है, राज्य जीएसटी में राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले सभी करों का समावेश होगा।
केंद्र का बिक्री कर समाप्त हो जाएगा। माल व सेवाओं पर एक ही आधार मूल्य पर केंद्र व राज्य जीएसटी लगेगा।
मालमत्ता बिक्री पर खरीद व बिक्री मूल्य के फर्क पर जीएसटी लगेगा न कि पूरे मूल्य पर।
खरीद पर दिए गए पूरे जीएसटी का इनपुट क्रेडिट मिलेगा चाहे उसे किसी भी जगह और कहीं से भी वसूला गया हो।
किन सेवाओं पर जीएसटी लगेगा यह केंद्र सरकार तय करेगी।
कुछ सेवाओं पर राज्य सरकार दोहरा जीएसटी लगा सकती है।
जिन सेवाओं पर राज्यों को जीएसटी लगाना है, उन्हें चुनने का अधिकार राज्य सरकार के पास होगा।
आयातित माल पर भी जीएसटी लगने की उम्मीद मगर खरीदार को उसका इनपुट क्रेडिट मिलेगा।
निर्यात वस्तु के मूल्य में जीएसटी का कुछ भी अंश नहीं रहना चाहिए।

मौजूदा कर प्रणाली

केंद्र सरकार के कर हैं--आय कर, उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क, सेवा कर केंद्रीय बिक्री कर (अंतरराज्यीय स्तर पर सामान की बिक्री होने पर) केंद्र व राज्य सरकार द्वारा स्टांप शुल्क । 
राज्य द्वारा लगाए जाने वाले कर वैटबिक्री कर।
शराब पर लगता है आबकारी कर।
भूमि कर, टोल टैक्स, बिजली कर, रोड टैक्स, प्रोफेशन टैक्स,जुआ, लॉटरी आदि पर लक्जरी कर।
स्थानीय निकाय द्वारा लगाए जाने वाले कर।
पानी कर, साफ सफाई कर, मालमत्ता कर, गृह कर आदि।

अंतरराज्यीय व्यापार पर कर

बिकवाली वाले राज्य में दिए गए कर का जमा खरीदने वाले राज्य को।
खरीद वाला राज्य अपने व्यापारी को दूसरे प्रांत में दिए गए कर का क्रेडिट देगा, बगैर रजिस्टर्ड डीलर की बिक्री का कर वही राज्य रख लेगा।
किसी भी प्रकार का घोषणा पत्र नहीं रहेगा।
जीएसटी से पूरे देश में एक समान अप्रत्यक्ष कर हो जाएगा।
पूरे देश के व्यापारी कंप्यूटर के जरिए जुड़ जाने पर कहीं भी दिए गए कर का इनपुट क्रेडिट कहीं भी ले सकेंगे।

कर छूट।

चालू छूट सीमा समाप्त हो जाने के बाद क्षेत्र आधारित छूट समाप्त।
वस्तु आधारित छूट की जगह अब रिफंड के जरिए रियायत मिलेगी।

विश्व भर में जीएसटी

अधिकतर देशों में एक जीएसटी प्रणाली। सभी प्रकार के सामान व सेवाओं पर लागू होता है।
चुनिंदा वस्तुओं को छोड़कर यह सभी प्रकार के क्षेत्रों पर लागू होता है।
खरीद पर दिए गए सभी करों का 100 फीसदी इनपुट क्रेडिट मिलता है।
कनाडा व ब्राजील दो ऐसे देश हैं जहां दो स्तरीय जीएसटी प्रणाली लागू है।

कैसे काम करेगा जीएसटी

व्यापारियों को कराना होगा पंजीकरण।
पंजीकृत सामान विक्रेता या सेवा प्रदान करने वालों को माल या सेवा की कीमत के अलावा अपने ग्राहक से जीएसटी भी लेना होगा।
अपनी खरीदारी या सेवा लेने पर जो जीएसटी आपने दिया है, उसका सेट ऑफ लेना होगा।

क्या शामिल होगा जीएसटी में

माल की बिक्री,जगह किराए देने पर।
कोई भी मशीन या वस्तु किराए पर देने की सलाह देना।
निर्यात या कोई भी चीज आपूर्ति करने पर

भारत में जीएसटी : खास बातें

यह दो स्तरीय होगा। केंद्रीय जीएसटी व राज्य जीएसटी।
बिक्री के अंतिम बिंदु तक समान दरें।
वस्तुओं का समान विभाजन।
समान फार्म, रिटर्न व चालान।
करों पर कर का बोझ नहीं।
केंद्र के जीएसटी का इनपुट क्रेडिट राज्य जीएसटी को नहीं।
कर माल के उत्पादन से खपत तक।
कर की दो दरें होंगी, कम व सामान्य।
कीमती धातु पर अत्यंत कम कर।
कुछ वस्तुओं पर कर से छूट।
बाकी वस्तुओं पर कर की सामान्य दर।
पेट्रोलियम, शराब व सिगरेट जैसे पदार्थ जीएसटी से बाहर।

जीएसटी की संभावित दरें

कर मुक्त हो सकते हैं--धान, ब्रेड, नमक, दूध, सब्जी, मांस, मछली आदि।
कम कर की दरें हो सकती हैं- चाय, दूध पाउडर, बीड़ी, खिलौने व साइकिल पर
सरकारी सहायता से चलने वाली शैक्षणिक संस्था व अस्पताल कर मुक्त।
टोल टैक्स, रोड टैक्स जीएसटी से बाहर रह सकते हैं।

जीएसटी : खास बातें

रिटर्न, कर संग्रह का तरीका आदि केंद्र व राज्य में एक समान।
आयकर के पैन नंबर की तरह 13 अंकों का टिन नंबर।
एचएसएन कोड के मुताबिक वस्तुओं का वर्गीकरण।
टिनसेक्स से हर व्यवहार पर नजर।

जीएसटी : फायदा

देश भर में जानकारी का आदान प्रदान व क्रास चेक करने के लिए कंप्यूटर आधारित टिन सेक्स प्रणाली लागू हो गई है। इससे कर चोरी पर अंकुश लगेगा व नियमों का पालन होगा। एक केंद्रीय डाटा बैंक रहेगा जिसमें सभी कर संग्रहकर्ता जानकारी देंगे। इससे कागज रहित कार्य होंगे।

राज्यों में संसाधन की कमी व कंप्यूटर की जानकारी के अभाव में जीएसटी लागू करने में परेशानी आ सकती है।

विभिन्न देशों में जीएसटी की दरें

चीन                      17 फीसदी
इंडोनेशिया          10 फीसदी
फिलीपींस            10 फीसदी
ताइवान                 5 फीसदी
ब्रिटेन                17.5 फीसदी
ऑस्ट्रेलिया          10 फीसदी
फ्रांस                  19.6 फीसदी
जर्मनी                  16 फीसदी
डेनमार्क                25 फीसदी

  
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