Monday, Nov 23, 2009
    Archive     
                                
होम > अर्थव्यवस्था   

कैसे देंगे कर, जब जानेंगे ही नहीं कंप्यूटर
कारोबारी कहते हैं कि जीएसटी प्रणाली पूर्ण रूप से कंप्यूटर से जुड़ी होगी। लेकिन सरकार कारोबारियों को कंप्यूटर की जानकारी देने के लिए क्या कर रही है? कितने कारोबारियों को कंप्यूटर चलाना आता है?
राजीव कुमार /  November 02, 2009

सरकार ने 1 अप्रैल, 2010 से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने का ऐलान कर दिया है।

हालांकि हाल के सरकारी बयान के बाद इस प्रणाली के तय समय पर लागू होने में संदेह होने लगा है। पर दूसरा दिलचस्प पहलू यह है कि यह प्रणाली लागू होने के बाद जो व्यापारी सरकार के लिए कर संग्रह का काम करेंगे, उन व्यापारियों को जीएसटी की बहुत ही मामूली जानकारी है या फिर बिल्कुल नहीं है।

उन्हें भी आमलोगों की तरह सिर्फ इतना पता है कि यह अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में सुधार लाने की एक प्रक्रिया है और इसके लागू होने के बाद वैट समाप्त हो जाएगा। यह कर प्रणाली दोहरी होगी आदि-आदि। व्यापारी अपनी इस जानकारी के अभाव के लिए सरकार को दोषी ठहरा रहे हैं।

उनका कहना है कि सरकार के नुमाइंदों ने व्यापारी वर्ग के साथ कभी भी इस मसले पर कोई चर्चा नहीं की। व्यापारियों को यह भी आशंका है कि उन्हें इस प्रणाली के लागू होने के बाद क्या वाकई कर विभाग के अफसरों से राहत मिल जाएगी। उन्हें यह भी आशंका है कि इस प्रणाली के लागू होने से सरकार के राजस्व में कोई बढ़ोतरी हो पाएगी।

कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव प्रवीन खंडेलवाल कहते हैं, 'निश्चित रूप से जीएसटी लागू होने से सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी, लेकिन यह तभी संभव होगा जब इस प्रणाली को सही तरीके से लागू किया जाएगा।'

वे कहते हैं कि आज व्यापारी वर्ग को बिक्री कर विभाग की सीढ़ियां चढ़ने में डर लगता है क्योंकि उन्हें पता है कि दफ्तर में पहुंचते ही अफसर उन्हें परेशान करेंगे और कई तरह के झमेले में उलझा देंगे। दूसरी बात यह है कि जो कारोबारी 20-30 सालों से कर दे रहे हैं और उनसे भूल से कोई चूक हो जाए तो उन्हें कर विभाग के अधिकारी दंडित करने में जरा भी देर नहीं करते।

इससे कारोबारियों में सरकार की कर प्रणाली के प्रति विश्वास कम होता है। अगर सरकार कारोबारियों को राहत देगी तो अधिक से अधिक व्यापारी कर प्रणाली से जुड़ेंगे और सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी। कारोबारियों के मुताबिक देश भर में 6 करोड़ से अधिक व्यापारी हैं, लेकिन मात्र 2-2.5 लाख कारोबारी ही सरकार के यहां पंजीकृत है।

ऐसा इसलिए कि सरकार ने कभी कारोबारियों को अपनी प्रणाली को सरल तरीके से समझाने की कोशिश नहीं की। सरकार की जटिल कर प्रणाली से कारोबारियों हमेशा भयभीत रहते हैं। कारोबारी कहते हैं कि जीएसटी प्रणाली पूर्ण रूप से कंप्यूटर से जुड़ी होगी। लेकिन सरकार कारोबारियों को कंप्यूटर संचालित करने की जानकारी देने के लिए क्या कर रही है?

खंडेलवाल कहते हैं, 'पंजीकृत सभी कारोबारियों को कंप्यूटर की खरीदारी के लिए सरकार की तरफ से रियायत मिलनी चाहिए। साथ ही उन्हें जीएसटी का साफ्टवेयर भी सरकार की तरफ से मुफ्त मुहैया कराया जाना चाहिए।' व्यापारियों की शिकायत है कि कर रिफंड के जटिल प्रावधानों के कारण व्यापारियों को रिफंड मिलने में काफी दिक्कत होती है। इसलिए जीएसटी के तहत एक फूल प्रूफ प्रणाली अत्यंत आवश्यक है।

उनकी मांग है कि इस प्रणाली के तहत सभी राज्यों में कर मुक्त सूची एक हो और एक राज्य से दूसरे राज्य में स्टॉक ट्रांसफर कर मुक्त होना चाहिए। पूंजीगत वस्तुओं और कच्चे माल की कर दर सबसे कम होनी चाहिए। हालांकि सरकार ने अब तक जीएसटी से जुड़ी किसी जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया है।

कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने जीएसटी को लेकर एक मांग पत्र तैयार किया है।
मांग पत्र के प्रमुख बिंदु कुछ इस प्रकार की प्रणाली हो जिससे उत्पादन खर्च की कमी का लाभ ग्राहक तक पहुंच सके
बड़े उत्पादक व बड़ी कंपनियों पर यह जवाबदेही डाली जाए कि जीएसटी पूर्व के उत्पादन खर्च व बाद की कीमत घोषित हो सके
केंद्र व राज्य सरकार के अलावा स्थानीय प्रशासन भी कई तरह के कर लगाते हैं, यह कर जीएसटी में सम्मिलित कर दिए जाएं
वैट पंजीयन संख्या ही जीएसटी संख्या हो। वैट के तहत पंजीकृत व्यापारियों को अलग से जीएसटी नंबर लेने की जरूरत नहीं हो
नया जीएसटी नंबर लेने की प्रक्रिया अति सरल हो
व्यापारियों को आसानी से रिफंड मिलने का इंतजाम हो
केंद्र व राज्यों के स्तर पर जीएसटी को लेकर व्यापार उद्योग नेता व अधिकारियों के एक अध्ययन समूह का निर्माण हो जो आपस में इस प्रणाली के हर पहलू पर सूक्ष्म विचार कर सके

  
New Document
  
चर्चाओं की वजह से चढ़े डीएलएफ के शेयर
बडे अधिकारियों के रिश्तेदारों को नहीं मिलेंगे ठेके
दूध के साथ अब पानी भी बेचेगी पराग डेयरी
5,100 के ऊपर जाएगा निफ्टी!
इंडिया फ्वाइल ने नियुक्त किया नया निदेशक
  
13वें वित्त आयोग की रिपोर्ट दिसंबर में
इसी सत्र में आएगा हरित न्यायाधिकरण विधेयक
खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर बढ़कर हुई 14.55 फीसदी
'सरकार को हो सकता है 75 हजार करोड़ रु. का घाटा'
सुबीर गोकर्ण नियुक्त हुए डिप्टी गवर्नर
मस्ज़िद, मंदिर पर कैसा कर!
एकल नियामक प्रस्ताव पर चर्चा गरम
कुछ ज्यादा ही पूंजी मांग रहे हैं बैंक : सरकार
 
  
क्या लंबे समय तक कायम रहेगा दूरसंचार में प्राइस वॉर?
हां
नहीं
  
  17021.85 (236.2)
  5052.45 (63.45)
  46.64  
  17222 (-9)  
  28343 (31)  
: 20/11/09 00:00
 
ABOUT US PARTNER WITH US JOBS@BS ADVERTISE WITH US TERMS & CONDITIONS CONTACT US
Business Standard Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com

Site best viewed with IE 6.0 or higher, Firefox 2.0 & above at a minimum screen resolution of 1024 x 768 pixels on Windows XP or Windows Vista operating system.