| विवादों के बीच 'राजा' | | हफ्ते की शख्सियत : ए. राजा, सूचना प्रौद्योगिकी व संचार मंत्री | | | मानसी तनेजा / October 30, 2009 | | | | |
विवाद और संचार मंत्रालय का लंबे समय से नाता रहा है। दरअसल, 90 के दशक के मध्य में जब दूरसंचार क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोला गया है, तभी से मंत्रालय अक्सर विवादों में रहा है।
पिछले हफ्ते सीबीआई ने ए. राजा के कार्यालय पर छापा मारा। इससे पहले 1996 में कांग्रेस सरकार में संचार मंत्री सुखराम पर भी सीबीआई की टेढ़ी नजर रही थी। सीबीआई ने सुखराम के निवास पर छापा मार कर वहां से करोड़ों रुपये बरामद किए।
उसके बाद उन पर मामला दर्ज हुआ और आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुखराम को इस साल की शुरुआत में दोषी ठहराया गया। यह रकम तेजी से उभरते दूरसंचार क्षेत्र के लिए लाइसेंस पाने की इच्छुक निजी कंपनियों से हासिल की गई थी। उसके बाद भाजपा सरकार में संचार मंत्री रहे प्रमोद महाजन को भी एक निजी कारोबारी घराने का पक्ष लेने पर विवाद का सामना करना पड़ा।
दरअसल, उन पर यह आरोप लगा कि दूरसंचार मंत्रालय ने मामूली शुल्क लेकर संबंधित कंपनी को सीडीएमए तकनीक दिलाने में मदद पहुंचाई, जबकि पहले जीएसएम तकनीक शुरू करना अनिवार्य था। हालांकि यह आरोप कभी साबित नहीं हुआ और न ही उनके मंत्रालय पर सीबीआई का छापा पड़ा।
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