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बनेगा उर्वरक सब्सिडी का नया सिस्टम
उर्वरक उद्योग
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली July 07, 2009

उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग के बावजूद फसलों के उत्पादन में खासी बढ़ोतरी न होने की प्रवृत्ति को वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने मौजूदा बजट में गंभीरता से लिया है।

उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग को हतोत्साहित करने और पोषक तत्वयुक्त उर्वरक को बढ़ावा देने के उपाय की घोषणा वित्त मंत्री ने इस बजट में की है। अपने बजट भाषण में मुखर्जी ने कहा, ''सरकार उत्पाद-मूल्य आधारित मौजूदा सब्सिडी प्रणाली की बजाय पोषकतत्व पर आधारित सब्सिडी प्रणाली को प्रोत्साहित करेगी।''

असल में इस कदम की शुरुआत यूपीए सरकार के पिछले पूर्ण बजट में ही की गई थी। समझा जा रहा है कि अब इस तरह की सब्सिडी प्रणाली को बजट का हिस्सा बना लिया जाएगा। नई प्रणाली के तहत सब्सिडी का निर्धारण किसी उर्वरक में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की मात्रा के अनुसार होगा। अब तक पोषक तत्वों की मात्रा के बजाय हर तरह के उर्वरकों पर सब्सिडी दी जाती रही है।

गौरतलब हो कि सब्सिडी की मौजूदा प्रणाली यूरिया जैसे नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों के इस्तेमाल को बढ़ावा देती है। दूसरी ओर इस वजह से फॉस्फेटयुक्त और पोटाशयुक्त उर्वरकों का कम इस्तेमाल होता है। परिणाम यह हुआ कि मिट्टी में नाइट्रोजन, फॉस्फेट और पोटाश का असंतुलन हो गया। इससे मिट्टी की उर्वरता पर प्रतिकूल असर पड़ने लगा और उपज में अपेक्षानुरूप बढ़ोतरी नहीं हो रही है।

पोषक तत्व आधारित सब्सिडी देने से मिट्टी और फसलों के उपयुक्त पोषक तत्वों का इस्तेमाल बढ़ेगा। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने उम्मीद जताई है कि पोषक तत्व आधारित सब्सिडी देने से बाजार में कई नए उर्वरक उत्पाद वाजिब दामों पर उपलब्ध होंगे।

उर्वरक उद्योग के सूत्रों के मुताबिक, उर्वरक उत्पादकों को अब विभिन्न तरह के उर्वरक का उत्पादन करने का प्रोत्साहन मिलेगा। वे अब जिंक, सल्फर, मैंगनीज जैसे सूक्ष्मपोषक तत्व वाले उर्वरक उत्पादित कर सकेंगे। यहां की मिट्टी में ऐसे तत्वों की अब तक कमी पाई जाती रही है। सरकार के ताजा उपाय से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

पुरानी पद्धति के तहत, सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) जैसे उर्वरक के उत्पादक नुकसान में रहते थे। उन्हें सल्फर के लिए कोई समर्थन नहीं दिया जाता था। मालूम हो कि देश की करीब 40 फीसदी मिट्टी में सल्फर की कमी पाई जाती है। ऐसे में अच्छी फसल के लिए सल्फरयुक्त उर्वरक की जरूरत होती है। वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई है कि इस कदम से उर्वरक उद्योग में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

उद्योग सूत्रों के मुताबिक, सब्सिडी की अवास्तविक प्रणाली और इसके भुगतान में विलंब होने से इस क्षेत्र में कम निवेश हो पाता था। मजेदार बात है कि पिछले 10 साल में इस क्षेत्र में कोई बड़ा निवेश नहीं हुआ है। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार ऐसी प्रणाली विकसित करने की कोशिश कर रही है, जिसमें उर्वरक सब्सिडी किसानों को सीधा मिले।

अभी तक उर्वरक उद्योग के जरिए सब्सिडी दी जाती रही है। किसानों को उर्वरक के प्रत्यक्ष भुगतान का प्रस्ताव पिछले बजट में ही किया गया था। तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिंदबरम ने कहा था कि कुछ इलाकों में इस योजना को प्रयोग के तौर पर शुरू किया जा रहा है। हालांकि उद्योग जगत के मुताबिक, इस दिशा में अब तक बहुत कुछ नहीं किया गया है।

  
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