| रक्षा बजट पर दिखा छठे वेतन आयोग का असर | | रक्षा | | | बीएस संवाददाता / नई दिल्ली July 06, 2009 | | | | |
छठे वेतन आयोग को लागू करने का असर रक्षा क्षेत्र के बजट आवंटन पर साफ नजर आ रहा है।
सरकार ने 2009-10 के लिए रक्षा बजट आवंटन में 34 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की है। मुखर्जी ने 2009-10 के लिए रक्षा बजट के लिए आवंटन 1,41,703 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया है, जो 2008-09 के 1,05,600 करोड़ रुपये की तुलना में 36,103 करोड़ रुपये ज्यादा है।
इस बढ़ोतरी में पेंशन में बढ़ोतरी भी शामिल है, जो छठे वेतन आयोग के परिणामस्वरूप करीब 5000 करोड़ रुपये बढ़ी है। 2008-09 के बजट अनुमानों में पेंशनभोगियों पर 15,600 करोड़ का खर्च था, जो संशोधित अनुमानों में 20,233 करोड़ रुपये हो गया।
वर्तमान बजट में कुल 21,790 करोड़ रुपये का प्रावधान इस मद में किया गया है। वेतन का बिल भी 2008-09 के 54,560 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्तमान बजट में 81,388 करोड़ रुपये हो गया है। रक्षा बजट में 7,000 करोड़ रुपये का प्रयोग नहीं किया जा सका और यह वापस गया। इसका कारण यह है कि हथियार खरीद के लिए आवंटित राशि से हथियार नहीं खरीदा जा सका।
2008-09 में इसके लिए पूंजी 48,007 करोड़ रुपये थी। लेकिन योजना के मुताबिक हल्के हेलीकाप्टरों और 155 एमएम आर्टिलरी गन्स की खरीद नहीं हो सकी, जिसके चलते सरकार के पास पैसे वापस चले आए। हमेशा की तरह थल सेना और वायु सेना को हथियार और उपकरणों की खरीद के लिए मोटी रकम मिलती है, वह राशि बगैर खरीद के सरकार के पास वापस चली आई।
थल सेना को 8,345 करोड़ रुपये हथियारों की खरीद के लिए दिया गया था, जिसमें से केवल 6,268 करोड़ रुपये खर्च किया गया। वायुसेना को 6,290 करोड़ रुपये आवंटित किया गया था, लेकिन उसने भी करीब 1000 करोड़ रुपये कम खर्च किया।
सशस्त्र दस्ते के पूंजीगत परिव्यय के लिए 2009-10 में 54,824 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अभी एक साल से भी कम हुए- अक्टूबर 2008 में नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में कमजोर नौसेना दस्ते के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की गई थी।
रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर युध्द की स्थिति आए तो भारत के पनडुब्बी बेड़े के 48 प्रतिशत से ज्यादा उपकरण काम नहीं करेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है, '1985 में बनी योजना की तुलना में भारतीय नौ सेना में वर्तमान में 67 प्रतिशत क्षमता ही है।' इसमें से कुछ पनडुब्बियां तो अपनी अधिकतम अवधि पूरा कर चुकी हैं।
बहरहाल वर्तमान बजट से इसमें कोई सुधार नहीं होने का संकेत मिलता है, नौ सेना दस्ते के लिए 72,00 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिसमें केवल 4,000 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए। रक्षा बजट में 34 प्रतिशत की वृध्दि को अच्छी-खासी बढ़ोतरी माना जा रहा है।
2007-08 में रक्षा बजट 96,000 करोड़ रुपये था, जिसमें 10 फीसद की वृध्दि कर इसे 2008-09 में 1,05,600 करोड़ रुपये किया गया। मुखर्जी ने लोकसभा चुनाव से पहले 16 फरवरी को पेश अंतरिम बजट में भी रक्षा क्षेत्र के लिए इतने ही आवंटन का प्रस्ताव किया था।
भारत का रक्षा खर्च अन्य देशों की तुलना में काफी कम है। भारत का रक्षा खर्च जीडीपी का 2 प्रतिशत है, जबकि चीन का रक्षा खर्च जीडीपी का 7 प्रतिशत और पाकिस्तान का 5 प्रतिशत है।
एक रैंक, एक पेंशन
सरकार ने भूतपूर्व सैनिकों के लिए 'एक रैंक एक पेंशन' संबंधी समिति की सिफारिशें स्वीकार कर ली हैं और इन्हें एक जुलाई 2009 से लागू किया जाएगा। इसका लाभ 12 लाख से अधिक जवानों और जेसीओ'ज को मिलेगा। मुखर्जी ने बजट पेश करते हुए यह घोषणा की।
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