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घाटे के मर्ज ने बढ़ाई मुश्किलें
राजकोषीय घाटा
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली July 06, 2009

सरकार के बढ़ते खर्चों का राजकोष पर पूरा असर दिख रहा है।

इसी का नतीजा है कि सरकार की आमदनी और सरकार के खर्चे में चालू वित्त वर्ष में इतना ज्यादा अंतर आ सकता है कि यह देश के सकल घरेलू उत्पद (जीडीपी) के  6.8 फीसदी के बराबर पहुंच सकता है। ऐसा होने पर राजकोषीय घाटा पिछले 16 सालों का रिकॉर्ड तोड़ देगा।

पिछले वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 6.2 फीसदी के बराबर रहने का अनुमान लगाया गया था। बढ़ते राजकोषीय घाटे से वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने चिंता जाहिर की लेकिन वह इससे निपटने के लिए कोई कारगर योजना के बारे में नहीं बता सके।

राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (एफआरबीएम) के तहत राजकोषीय घाटे को काबू में करने के लक्ष्य के बारे में भी वित्त मंत्री ने कुछ नहीं कहा। एफआरबीएम के लक्ष्यों के तहत केंद्र सरकार को अपना राजकोषीय घाटा कम कर जीडीपी के 3 फीसदी के बराबर करना है और मार्च 2010 तक अपना राजस्व घाटा पूरी तरह से समाप्त करना है।

अगर शुद्ध आंकड़ों की बात करें तो राजकोषीय घाटा पिछले सभी रिकॉर्डों को तोड़ता हुआ 4,00,996 करोड़ रुपये का आंकड़ा छू चुका है। और इस घाटे को पूरा करने के लिए सरकार कर्ज लेने का रास्ता अख्तियार करने का मन बना रही है। घाटा पाटने के लिए सरकार बाजार से 3,97,957 करोड़ रुपये का  कर्ज ले सकती है।

इसका सीधा सा मतलब है कि सरकार ने कर्ज लेने के लिए जो पहले योजना तैयार की थी उससे भी 35,000 करोड़ रुपये अधिक का कर्ज सरकार को लेना होगा। सरकार के ज्यादा कर्ज लेने के कई और खतरे भी गिनाए जा रहे हैं। पिछले वित्त वर्ष के कर्ज अनुमान से चालू वित्त वर्ष में सरकार 3 गुना ज्यादा कर्ज ले सकती है। इससे देश में होने वाले निजी निवेश पर फर्क पड़ सकता है।

राज्य सरकारें भी बाजार से 21,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज लेने जा रही हैं। फरवरी में पेश हुए अंतरिम बजट में सरकार का राजकोषीय घाटा 1.3 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 68,000 करोड़ रुपये बताया गया था। चालू वित्त वर्ष में सरकार को जीडीपी के 4.8 फीसदी के बराबर राजस्व घाटा हो सकता है।

पिछले वित्त वर्ष में यही घाटा जीडीपी के 4.4 फीसदी के बराबर रहा था। राजकोषीय घाटे में ब्याज चुकाने के बाद प्राथमिक घाटे का जो आंकड़ा बचता है उसके भी जीडीपी के 3 फीसदी रहने का अनुमान है। यह रकम 1,75,485 करोड़ रुपये बैठती है।

  
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