| मंत्रीजी ने नहीं दिखाई बदलाव की झंडी | | सीमा और उत्पाद शुल्क | | | बीएस संवाददाता / नई दिल्ली July 06, 2009 | | | | |
मंदी की मार से जूझ रहे उद्योग जगत को स्थायित्व देने के लिए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने मध्य मार्ग अपनाना ही बेहतर समझा।
बजट में सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा कर के साथ बहुत ज्यादा छेड़छाड़ नहीं की गई है। बजट में वित्त मंत्री से उम्मीदें लगाई जा रही थीं कि वह उत्पाद शुल्क को 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर देंगे लेकिन ऐसी उम्मीद लगाने वाले लोगों को निराशा ही हाथ लगी है।
सरकार ने कुछ उत्पादों पर जरूर उत्पाद शुल्क की दरें घटाई बढ़ाई हैं। इसके लिए सरकार का यही तर्क रहा कि वह मंदी के दौर में घरेलू उद्योगों को सहारो देने की कोशिश कर रही है। सरकार के इन कदमों से उपभोक्ताओं को फायदा होने की उम्मीद है। सरकार ने 10 जीवन रक्षक दवाओं पर सीमा शुल्क को 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है।
इसके अलावा ह्रदय चिकित्सा में काम आने वाले उपकरणों पर भी सीमा शुल्क को 7.5 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है। एलसीडी टेलीविजन पर सीमा शुल्क को 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है। हालांकि वित्त मंत्री ने केबल प्रसारण और डीटीएच में काम आने वाले सेट टॉप बॉक्स पर जरूर 5 फीसदी का सीमा शुल्क लगा दिया है। अभी तक सेट टॉप बॉक्स को सीमा शुल्क में छूट मिली हुई थी।
प्राइसवाटरहाउस कूपर्स में कार्यकारी निदेशक आर मुरलीधरन के मुताबिक वित्त मंत्री ने सीमा शुल्क की ऊंची दरों के साथ ज्यादा छेड़छाड़ नहीं की है। इससे मंदी की मार से जूझ रहे घरेलू उद्योगों को सहारा मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा सरकार ने नई और अक्षय ऊर्जा के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाए हैं। इसके लिए सरकार ने 500 किलोवाट से ज्यादा की क्षमता वाले पवन ऊर्जा से चलने वाले विद्युत जेनरेटरों में काम आने वाले पर्मानेंट मैग्नेट पर सीमा शुल्क को 7.5 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है। साथ ही बायोडीजल पर भी 7.5 फीसदी के सीमा शुल्क को घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है।
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